
पांढुरना। पांढुरना तहसील के दो ग्रामों के दो ग्राम कोटवार इस मंहगाई के युग में महज 1000 रु मासिक वेतन पर नौकरी कर रहे हैं, इतनी कम राशी में यह तथा इनके परिवार कैसे गुजारा करते होगें इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता हैं, पैसौ के अभाव में कई बार तो पूरे फाके में दिन गुजारने पड़ते हैं। सरकार द्वारा इनके मासिक वेतन से ज्यादा तो रोजगार गारंटी योजना में काम करने वाले मजदुर को चार दिन में ही 1000 रु से ज्यादा का भुगतान गारंटी योजना में काम करने वालों को सरकार प्रति दिन 262 रु मजदुरी देती हैं , वहीं इन कोटवारों को मात्र 33 रु प्रतिदिन मजदुरी मिलती हैं जिसमें एक समय नास्ता भी नहीं होता ।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत इटावा के ग्राम कोलीखापा में बाबुराव नारनवरे और इटावा में वासुदेव धोंगडे 20 साल से ग्राम कोटवार कि नौकरी करते हैं ,उनको यह नौकरी पिता की मृत्यु के बाद विरासत में मिली है और इसके साथ ही 10 एकड़ शासकिय सेवा भुमि भी मिली है इस कारण उनको 1000 रु मासिक वेतन मिलता है , कोटवारों का कहना है कि उनको मिली सेवा भुमि बंजर और पथरीली होने के कारण कृषि करने योग्य नही है इस लिए सेवा भुमि निरस्त कर अन्य कोटवारों कि तरह 9000 रुपए मासिक वेतन दिया जाय । इसके लिए उन्होंने 20 साल मे कई बार ग्राम पंचायत से प्रस्ताव लेकर तहसीलदार , वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियो से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी ।
कोटवारों ने अपनी पिडा बयां करते हुए बताया की 1000 रुपए में घर खर्च नहीं चलता इस लिए परिवार का पालन-पोषण करने के लिए किसानों के खेतों में मजदुरी करने के लिए जाना पड़ता है कई बार तो मजदुरी नहीं मिलने पर बाल –बच्चो सहित भुखा रहने कि भी नौबत आती है , जानकारी के अनुसार कोटवारों को नियमानुसार गांव में रहकर हर गतिविधि पर नजर रख कर प्रशासन के अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाई जाने का कार्य सुश्चित है लेकिन अधिकारी इसके अलावा भी कोटवारों से कई काम कराते हैं ,माह के दो तीन दिन तहसील कार्यालय में रात्रिकालीन ड्युटी लगाते हैं और कई बार मिटिंग में भी बुलाते हैं, इस तरह आने-जाने में उनके सौ- डेढ़ सौ रुपए खर्च हो जाते हैं।
