ममता ने नरेन्द्र मोदी के हालिया संबोधन पर ‘देश को गुमराह’ करने का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर अपने संबोधन में ‘देश को गुमराह करने’ का आरोप लगाया।

महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने अपनी पार्टी के रुख का बचाव भी किया।

मुख्यमंत्री ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने ईमानदारी से बात करने की बजाय देश को गुमराह करना पसंद किया।” उन्होंने केंद्र सरकार के रुख का कड़ा विरोध करते हुए अपनी बात रखी।

सुश्री बनर्जी ने जोर देकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है और उन सुझावों को खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का विरोध करती है। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वकालत की है। संसद और राज्य विधानमंडल दोनों में हमारे पास निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों का अनुपात सबसे अधिक है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि लोकसभा में उनकी पार्टी की 37.9 प्रतिशत और राज्यसभा में नामांकित सदस्यों में 46 प्रतिशत महिलाएं हैं, इसलिए महिला आरक्षण के विरोध का सवाल ही नहीं उठता।

हालांकि, सुश्री बनर्जी ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इसे राजनीतिक लाभ के लिए थोप रही है। उन्होंने कहा, “हम मौलिक रूप से उस परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ हैं जिसे मोदी सरकार अपने निहित राजनीतिक एजेंडे के लिए महिलाओं को ढाल बनाकर आगे बढ़ा रही है।”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह कदम बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को बदलने जैसा होगा और चेतावनी दी कि इससे अन्य राज्यों की कीमत पर भाजपा शासित राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

इसे ‘संघीय लोकतंत्र पर हमला’ बताते हुए सुश्री बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने के बाद इसके क्रियान्वयन में देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, “अगर यह सरकार इस नेक काम के प्रति वाकई गंभीर थी, तो उसने लगभग तीन साल तक इंतजार क्यों किया? जब कई राज्यों में चुनाव हैं तब इसे जल्दबाजी में क्यों लाया जा रहा है? और इसे परिसीमन के साथ क्यों जोड़ा गया?”

सुश्री बनर्जी ने प्रधानमंत्री के संवाद करने के तरीके पर भी निशाना साधा और उनसे संसद में इन मुद्दों पर बात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “अगली बार जब आप राष्ट्र को संबोधित करें, तो संसद के पटल से ऐसा करने का साहस जुटाएं, जहां आपकी जांच और जवाबदेही तय होती है।” उन्होंने प्रधानमंत्री की हालिया टिप्पणियों को ‘पाखंड’ करार दिया।

उनकी यह टिप्पणी महिला आरक्षण के कार्यान्वयन और प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर चल रहे बड़े राजनीतिक टकराव के बीच आई है, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। कई राज्यों में आगामी चुनावों के साथ यह मुद्दा एक प्रमुख केंद्र बन गया है।

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