
खंडवा। जहां एक ओर महिलाएं रोजगार के अवसरों की तलाश में भटकती हैं, वहीं ओंकारेश्वर क्षेत्र के ग्राम मोरटक्का की महिलाओं ने खुद ही रोजगार का रास्ता तैयार कर एक मिसाल कायम की है। “मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ी इन महिलाओं ने परंपरा, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता को जोड़ते हुए “आटे के दीपक” का नवाचार अपनाया और आज अपनी पहचान बना ली है।
समूह की अध्यक्ष विजया जोशी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास अब आय का स्थायी स्रोत बन चुका है। पहले जहां महिलाएं घर तक सीमित थीं, अब वे उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इन आटे के दीपकों की मांग लगातार बढ़ रही है। महिलाएं खुद दुकानों तक पहुंचकर अपने उत्पाद उपलब्ध करा रही हैं, जिससे उन्हें बाजार की समझ भी विकसित हो रही है। “लखपति दीदी” योजना के तहत मिली मदद और प्रशिक्षण ने इनके प्रयासों को नई दिशा दी है।
इस पहल की खास बात यह है कि यह केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की कहानी भी है। महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी सकारात्मक योगदान दे सकती हैं।
मोरटक्का की इन महिलाओं की यह यात्रा बताती है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ी सफलता की कहानी लिख सकते हैं।
