
सीहोर। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन करा चुके किसानों के सामने अब नई परेशानी खड़ी हो गई है. सेटेलाइट सर्वे में तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की जगह चना, मसूर या अन्य फसलें दर्ज हो रही हैं. इसके चलते जिले भर के करीब 10 हजार किसान स्लॉट बुकिंग नहीं करा पा रहे हैं. पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से तहसील, कृषि कार्यालय, सहकारी समितियों और ऑनलाइन पोर्टल के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय स्तर पर ही लगभग दो हजार किसान इस समस्या से प्रभावित हैं, जबकि पूरे जिले में यह संख्या करीब 10 हजार बताई जा रही है. किसानों ने पहले ही समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन करा लिया था, लेकिन जब स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू हुई तो पोर्टल पर उनकी फसल का विवरण बदलकर दूसरी फसलों के रूप में दिखाई देने लगा. इस तकनीकी त्रुटि के कारण आगे की प्रक्रिया बाधित हो रही है. किसानों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब सेटेलाइट के माध्यम से नरवाई जलाने जैसी घटनाओं का सटीक पता लगाया जा सकता है, तो फिर खड़ी गेहूं की फसल को चना या अन्य फसल के रूप में कैसे दर्ज किया जा रहा है. अब्दुल्लापुर के किसान मुकेश परमार, अमरोद के सुनील मेवाड़ा, अवंतिपुर के रमेश मेवाड़ा, आमाझिर के संतोष कुमार और उलझावन के मोहन सिंह सहित कई किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर फसल का सत्यापन भी कराया था, इसके बावजूद पोर्टल पर गलत जानकारी प्रदर्शित हो रही है.
स्थिति को और जटिल बनाते हुए पोर्टल बार-बार पुन: सत्यापन कराने का निर्देश दे रहा है. किसानों का कहना है कि कई बार सत्यापन के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है. वहीं कुछ स्थानों पर किसानों को यह कहकर वापस भेजा जा रहा है कि फिलहाल छोटे किसानों के स्लॉट बुक किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण सभी वर्ग के किसान प्रभावित हो रहे हैं.
जिले के सीहोर, आष्टा, इछावर, बुधनी, भैरुंदा, रेहटी और श्यामपुर क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान शिकायत कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि खरीदी पहले ही देरी से शुरू हुई है और अब स्लॉट बुकिंग की समस्या ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. गेहूं को लंबे समय तक घरों और खेतों में रखने से उसके खराब होने का खतरा बना हुआ है, वहीं समय पर उपज नहीं बेच पाने के कारण सहकारी समितियों और बैंकों का कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है.
किसानों ने यह भी बताया कि खरीदी में देरी का सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है. यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है. जिले में 20 हजार से अधिक किसानों के डिफॉल्टर होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे उनकी भविष्य में ऋण और खाद-बीज लेने की पात्रता प्रभावित हो सकती है. अन्नदाताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सेटेलाइट सर्वे में हुई त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए और जिन किसानों ने गेहूं का पंजीयन कराया है, उनके स्लॉट जल्द से जल्द बुक किए जाएं. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे.
सुधार प्रक्रिया सतत जारी है
सेटेलाइट सर्वे में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं. किसानों की शिकायत के आधार पर पटवारी की रिपोर्ट लेकर तहसीलदार स्तर पर सुधार की प्रक्रिया जारी है. किसान पूरी तरह आश्वस्त रहें. सभी के स्लॉट बुक किए जाएंगे और किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी सुनिश्चित की जाएगी.
अशोक उपाध्याय,
उप संचालक, कृषि
