जबलपुर: चरगवां क्षेत्र में तीन महीने पुराने जमीन विवाद का मामला आज फिर गरमा गया। सोमवार को पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया, जब चरगवां, बरगी और भेड़ाघाट पुलिस की संयुक्त मौजूदगी में राजस्व विभाग ने विवादित भूमि का सीमांकन शुरू किया। यह वही जमीन है जिसे लेकर तीन माह पूर्व दो पक्षों के बीच तीखा विवाद हुआ था और मामला चक्काजाम तक पहुँच गया था।
नपाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि का वास्तविक स्वरूप क्या है क्या यह श्मशान, कब्रिस्तान की भूमि है, सरकारी चारागाह है या किसी का निजी स्वामित्व है। फिलहाल, एहतियातन क्षेत्र में पुलिस तैनात है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।विदित हो कि तीन महीने पहले ग्राम बड़ैयाखेड़ा की एक बुजुर्ग महिला, फतीमा बी की मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद जब शव को दफनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुरजोर विरोध किया।
उनका दावा था कि जिस जमीन पर शव दफन किया जा रहा है, वह सरकारी चारागाह की भूमि है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का तर्क था कि यह स्थल दशकों पुराना कब्रिस्तान है और पूर्वजों को यहीं सुपुर्द-ए-खाक किया जाता रहा है। उस समय तनाव इतना बढ़ गया था कि प्रशासन की मौजूदगी में विवाद हुआ और हिंदू संगठनों ने जबलपुर- गोटेगांव मार्ग पर चक्काजाम कर दिया था।
स्थिति को बिगड़ता देख, मृतिका के परिजनों ने संयम परिचय दिया और शव को जबलपुर ले जाकर दफनाया था। प्रशासन ने उस समय आश्वासन दिया था कि जमीन की विधिवत नपाई कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। हालांकि, यह कार्रवाई पहले 9 तारीख को प्रस्तावित थी, लेकिन किन्हीं कारणों से टल गई थी। सोमवार सुबह से ही भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच वैध दस्तावेजों के आधार पर नपाई का काम शुरू किया गया
