भारत 2026 में बन सकता है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर बाजारः एनएसईएफआई

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (वार्ता) हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार की ओर से किये जा रहे प्रयासों के सकारात्म नतीजे देखने को मिल रहे हैं और 2026 में भारत दुनिया का सबसे बड़े सौर ऊर्जा बाजार बन सकता है।

नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) ने यह अनुमान लगाया है। एनएसईएफआई के अनुसार भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज करते हुए पिछले 14 महीनों में 50 गीगावाट क्षमता जोड़ा है और इसकी कुल स्थापित क्षमता 150 गीगावाट तक पहुंच गयी है। एनएसईएफआई यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में देश को 11 साल लगे थे, जबकि 100 गीगावाट तक पहुंचने में लगभग तीन साल का समय लगा।

एनएसईएफआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा, “भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा से 280–300 गीगावाट की उम्मीद की गई है। मौजूदा गति को देखते हुए भारत सालाना लगभग 50 गीगावाट की वृद्धि के ट्रैक पर है, जो इस लक्ष्य के अनुरूप है। इतना ही नहीं, पीएम सूर्य घर, आगामी पीएम कुसुम 2.0, फ्लोटिंग सोलर नीतियों और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी बढ़ती मांग के चलते आने वाले चार वर्षों में यह क्षमता इन अनुमानों से भी आगे जा सकती है।”

उन्होंने कहा, “अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में सौर क्षमता वृद्धि की गति धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं, जो फिलहाल दूसरे स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसके विपरीत भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और तय लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अगले वर्ष भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक सौर स्थापना वाला देश बनकर उभरेगा। भारत की यह सफलता विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों के लिए महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती है।”

एनएसईएफआई के अनुसार आने वाले तीन वर्षों में वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक (सी एंड आई) सौर क्षेत्र विकास के प्रमुख चालक होंगे।

उन्होंने कहा, “सी एंड आई ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहली बार लगभग 10 गीगावाट की वार्षिक स्थापना का आंकड़ा पार किया है और यह केवल शुरुआत है। हरित ऊर्जा तक मुक्त पहुँच, आभासी विद्युत क्रय समझौता (वीपीपीए) और नवीकरणीय उपभोग दायित्व (आरसीओ) जैसे नीतिगत उपाय मांग को बढ़ावा दे रहे हैं। अगले दो वर्षों में सी एंड आई क्षमता वृद्धि यूटिलिटी आधारित पीपीए के बराबर पहुंच सकती है।”

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और पीएम कुसुम जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं ने वितरित नवीकरणीय ऊर्जा को मजबूत किया है। वर्तमान में कुल सौर क्षमता में डीआरई की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

एनएसईएफआई विनिर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एएलएमएम) और मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) जैसे उपायों के चलते देश ने सोलर मॉड्यूल निर्माण में मजबूत स्थिति बनाई है और अब सोलर सेल के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

इस तरह से भारत के लिए एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा विकास का अहम वर्ष साबित हो सकता है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एनएसईएफआई का अनुमान है कि अगले 18 महीनों में भारत ऊर्जा भंडारण क्षमता में भी दो अंकों की वृद्धि हासिल करेगा।

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