
छतरपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापितों का आक्रोश उग्र रूप में सामने आया। मुआवजा वितरण में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी से नाराज आदिवासी एवं किसानों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासनिक टीम को मौके से खदेड़ दिया। हालात ऐसे बने कि अधिकारियों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा और वे जूते-चप्पल तक मौके पर छोड़ गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। हाल ही में सामने आए पटवारी रिश्वत कांड ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
अपनी मांगों को लेकर आदिवासी किसान पैदल दिल्ली जाने निकले थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। आरोप है कि प्रशासन ने उनका राशन और पानी तक छीन लिया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद ग्रामीणों ने डोधन बांध पर डेरा डालकर ‘चिता आंदोलन’ शुरू कर दिया, जिसमें प्रदर्शनकारी लकड़ियों की चिता बनाकर उस पर लेट गए।
जिला प्रशासन की टीम, जिसमें अपर कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया भी शामिल थे, समझाइश देने पहुंची, लेकिन करीब 700 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, जिसके बाद टीम को वापस लौटना पड़ा। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पूरे क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा भीड़ को भड़काया गया, जबकि प्रदर्शनकारी न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।
