पटना: बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता थमने का नाम नहीं ले रही है। करीब एक महीने से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही कवायद अब और पेचीदा होती दिख रही है। एनडीए नेतृत्व रोज़ नए समीकरणों के बीच संतुलन साधने की कोशिश में जुटा है, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पा रहा।शुक्रवार को जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्यता ग्रहण की, तब यह संकेत मिला कि राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
हालांकि, उसी दौरान सामने आए नए घटनाक्रमों ने इस प्रक्रिया को फिर उलझा दिया।अब जदयू के भीतर से यह मांग तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री पद पार्टी के हिस्से में ही आना चाहिए। पार्टी नेताओं का तर्क है कि जनता ने “फिर से नीतीश” के नाम पर जनादेश दिया है, ऐसे में जदयू का सीएम होना जरूरी है।सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर युवा नेताओं और वरिष्ठों के बीच इस बात पर सहमति बन रही है कि जदयू से ही नया चेहरा सामने लाया जाए। वहीं, यदि बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो महत्वपूर्ण विभाग जदयू को देने की शर्त भी रखी गई है। कुल मिलाकर, सत्ता संतुलन को लेकर अंतिम सहमति बनने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
