राधाकृष्णन ने सिंधी भाषा में संविधान का नवीन संस्करण जारी किया

नयी दिल्ली 1 अप्रैल (वार्ता) उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया। उप राष्ट्रपति ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर उप राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में सिंधी भाषी समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सिंधी सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांतिक दर्शन और सूफी विचारों के अनूठे संगम को दर्शाती है, जो एकता, प्रेम और भाईचारे के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देती है। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार सिंधी भाषा में विशेष रूप से देवनागरी लिपि में संविधान का प्रकाशन, भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा है, जो इसकी आकांक्षाओं को समाहित करती है, अधिकारों की रक्षा करती है और लोकतांत्रिक शासन का मार्गदर्शन करती है

उपराष्ट्रपति ने सरकार द्वारा संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल नागरिकों और शासन के बीच के अंतर को कम करने में सहायक होती है, क्योंकि इससे लोग संविधान को अपनी मातृभाषा में समझ पाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वास मजबूत होता है। श्री राधाकृष्णन ने संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली आदि भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाते हैं। सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा का वर्णन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभाजन के बाद के कठिन समय में यह भाषा दृढ़ता और एकता का प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा को 1967 में 21वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जिससे इसके सांस्कृतिक महत्व को मान्यता मिली और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका संरक्षण सुनिश्चित हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा के साथ-साथ सभी भाषाओं को समान महत्व और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की महत्वपूर्ण वाहक हैं। श्री राधाकृष्णन ने संविधान को क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय, विशेषकर क्षेत्रीय भाषा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी पहल नागरिकों को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करने में योगदान देगी। उपराष्ट्रपति ने विविधता में एकता की भावना और “राष्ट्र प्रथम” के मार्गदर्शक सिद्धांत को दोहराते हुए नागरिकों से अपनी मातृभाषाओं के साथ-साथ राष्ट्र की सामूहिक भाषाई विरासत का सम्मान करने का आग्रह किया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, लोकसभा सांसद शंकर लालवानी और विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Next Post

महू जनपद पंचायत की उपयंत्री 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ी

Fri Apr 10 , 2026
इंदौर. लोकायुक्त इंदौर की टीम ने महू जनपद पंचायत की उपयंत्री सावित्री मुवेल को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है. कार्रवाई शुक्रवार को ट्रैप डालकर की गई. निरीक्षक श्रीमती रेनू अग्रवाल ने बताया कि ग्राम पंचायत यशवंत नगर के सचिव रमेशचंद्र चौहान ने शिकायत की थी […]

You May Like