पुराना बकाया अधूरा, नए उपार्जन की तैयारी शुरू

जबलपुर: धान उपार्जन के दौरान किसानों को राहत देने के लिए प्रति क्विंटल 15 रुपए प्रासंगिक व्यय देने की घोषणा की गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक किसानों के खातों में एक भी रुपया नहीं पहुंचा है। इस देरी ने किसानों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।एक ओर धान उपार्जन का भुगतान लंबित है, तो दूसरी ओर 15 अप्रैल से गेहूं उपार्जन शुरू होने जा रहा है। जिला प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा है, लेकिन किसानों का कहना है कि पहले पुराने बकाए का भुगतान होना चाहिए।
उम्मीदों पर पानी, महीनों से खाली खाते
घोषणा के बाद किसानों ने अपनी संभावित राशि का आकलन कर लिया था और भुगतान की आस लगाए बैठे थे। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी खाते खाली हैं, जिससे किसानों की उम्मीदें अब टूटती नजर आ रही हैं। किसानों का कहना है कि जब तक 15 रुपए प्रति क्विंटल की राशि उनके खातों में नहीं आती, तब तक यह वादा अधूरा ही रहेगा। लगातार हो रही देरी से किसान जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं।
जिला उपार्जन समिति में हुआ था निर्णय
उल्लेखनीय है कि धान उपार्जन के दौरान जिला उपार्जन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। जिसमें समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को धान की भराई, ढुलाई और परिवहन के एवज में प्रति क्विंटल 15 रुपए का भुगतान किया जाना था। जिला उपार्जन समिति के अनुसार, इस राशि का भुगतान अधिकतम 1,000 रुपए तक किसानों के बैंक खाते में होना था। यह राशि उपार्जन समिति या उपार्जन समूह को दिए जाने वाले प्रासंगिक व्यय से समायोजित होनी थी।

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