नयी दिल्ली, 09 अप्रैल (वार्ता) विश्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगी।
विश्व बैंक की यहां जारी “भारत विकास अपडेट” में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधा का आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इस सुस्ती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद नीतिगत उपायों के कारण भारत पर पश्चिम एशिया में उत्पन्न भू-राजनैतिक संकट का प्रभाव उतना नहीं होगा। भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, मुद्रास्फीति की दर कम है, सरकारी उधारी का अधिकांश हिस्सा रुपये में है, वित्तीय सेक्टर मजबूत है और बाहरी चुनौतियों का समाना करने में व्यापार में विविधता मददगार साबित हो रही है।
विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। यह पिछले वित्त वर्ष की 7.6 प्रतिशत की विकास दर से कम है जो भारत ने अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाये जाने के बावजूद हासिल किया था।
इससे पहले बुधवार को रिजर्व बैंक ने इस साल देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था।
भारत में विश्व बैंक के कार्यकारी पॉल प्रोसी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास तथा युवाओं की कार्यबल में और अधिक भागीदारी की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा तथा अवसंरचना, विनिर्माण, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और कृषि से संंबंधित क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने तथा रोजगार सृजन की जरूरत होगी। यह सब तभी संभव है जब स्थिर तथा कारोबार के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाये।
रिपोर्ट में इस साल दक्षिण एशिया की विकास दर कैलेंडर वर्ष 2025 के सात प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसमें कहा गया है कि साल 2027 में दक्षिण एशिया में 6.9 प्रतिशत की विकास दर रहने का संभावना है।
