मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के स्थिर रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में यह फैसला लिया गया, जिसका अर्थ है कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। इस निर्णय से उन करोड़ों लोगों को बड़ी राहत मिली है जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) चुका रहे हैं। रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकों पर कर्ज की दरें बढ़ाने का दबाव कम होगा, जिससे आम आदमी के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना फिलहाल टल गई है।
भले ही ब्याज दरें नहीं बढ़ाई गई हैं, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। आरबीआई के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में संभावित रुकावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम है। यदि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर पड़ेगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में महंगाई नियंत्रण से बाहर होती है, तो वे दरों में बदलाव करने से पीछे नहीं हटेंगे।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का प्रारंभिक अनुमान लगाया है। बचत करने वाले ग्राहकों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए यह खबर मिली-जुली है, क्योंकि रेपो रेट स्थिर रहने से एफडी पर मिलने वाले ब्याज में भी फिलहाल बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। हालांकि, बाजार में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुछ बैंक चुनिंदा अवधि की जमा योजनाओं पर आकर्षक ब्याज दरें देना जारी रख सकते हैं। आरबीआई अब पूरी तरह से वैश्विक परिस्थितियों और मानसून के प्रभाव पर नजर बनाए हुए है, ताकि आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

