बुधनी। ग्राम जर्रापुर स्थित गुंजारी-नर्मदा संगम घाट पर शनिवार को अवधूत महायोगी दादा गुरू का आगमन हुआ, जहां पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया. इस दौरान दादा गुरू ने मंत्री पटेल द्वारा प्राचीन घाट एवं मंदिर के संरक्षण के लिए किए जा रहे श्रमदान कार्यों की सराहना की.
उपस्थितजनों से चर्चा करते हुए महायोगी दादा गुरू ने कहा कि गुंजारी-नर्मदा संगम पर स्थित राधाकृष्ण मंदिर एवं प्राचीन घाट अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर हैं. इनका संरक्षण जल गंगा संवर्धन अभियान का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाएं.
उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद पटेल के प्रयासों से ग्राम जर्रापुर में नर्मदा तट पर स्थित प्राचीन मंदिर और घाट के जीर्णोद्धार का कार्य जनसहयोग से तेजी से किया जा रहा है. स्वयं मंत्री पटेल लगातार स्थल का निरीक्षण कर श्रमदान में भाग ले रहे हैं, जिससे प्रेरित होकर बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं.
गुंजारी आश्रम के महंत केशव दास महाराज के अनुसार यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है, जिसका निर्माण मुगलकाल में हुआ था. वर्षों से उपेक्षा के कारण यह प्राचीन घाट और मंदिर मिट्टी में दबकर गुम हो गए थे.मंत्री पटेल को इस स्थल की जानकारी मिलने पर इसके जीर्णोद्वार का संकल्प लिया. यह उनका तीसरा दौरा है, जिसमें दादा गुरू शामिल हुए और कार्यों का जायजा लिया.
दादा गुरू ने बताया कि गुंजारी घाट मंदिर का उल्लेख नर्मदा पुराण में मिलता है. जनभागीदारी से चल रहा स्वच्छता और जल संवर्धन अभियान न केवल घाट के प्राचीन स्वरूप को पुनर्जीवित कर रहा है, बल्कि समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रहा है. मां नर्मदा के तट पर स्वच्छता, संरक्षण और संवर्धन का यह प्रयास सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है. मिट्टी में दबे इस घाट का स्वरूप अब सामने आ रहा है, जो गौरव का विषय है.
