
जबलपुर। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का लाभ नियमानुसार प्रदान किया जाये। हाईकोर्ट जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुशंसा पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं 60 दिनों में करते हुए निर्णय लें। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि निर्णय से याचिकाकर्ता को अवगत करवाये, जिससे उसे दूसरी बार न्यायालय की शरण नहीं लेना पडे।
याचिकाकर्ता डॉ. ओमप्रकाश पांडे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में सिविल अस्पताल मैहर में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत है। वह साल 2012 से निरंतर सेवारत हैं। उसने नीट परीक्षा 2025 परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है परंतु उसे बोनस अंक का लाभ प्रदान नहीं किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा 28 जून 2019 को जारी किये गये आदेश के अनुसार तथा भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रावधानों के तहत ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत तथा अधिकतम 30 प्रतिशत अंक का सेवारत कोटा प्रदान किया जायेगा। बोनस अंक प्रदान करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला सतना द्वारा विधिवत अनुशंसा की गयी थी। इसके बावजूद भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा लाभ प्रदान नहीं किया गया। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गयी है।
एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने पैरवी की।
