25-30 साल का अनुभव बनाम TET: महाराष्ट्र के फैसले को MP पर थोपना गलत,पुनर्विचार हो- दिग्विजय

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य के शासकीय स्कूलों में कार्यरत दो लाख से अधिक शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या क्यूरेटिव याचिका दायर करने का आग्रह किया है, ताकि टीईटी की अनिवार्यता को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) के बजाय भविष्य प्रभाव (प्रॉस्पेक्टिव) से लागू किया जा सके।

दिग्विजय ने अप्रैल 2010 में मध्यप्रदेश में लागू हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि सेवानिवृत्ति के निकट पहुंच चुके शिक्षकों को इससे छूट दी गई है, लेकिन अन्य शिक्षकों के लिए परीक्षा में असफल होने पर सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का खतरा उत्पन्न हो गया है।

मार्च 2026 में राज्य शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा और परीक्षाएं जुलाई-अगस्त में प्रस्तावित हैं। सिंह ने कहा कि इस निर्णय से विशेष रूप से 25 से 30 वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों में व्यापक चिंता का माहौल है, क्योंकि सेवा के अंतिम चरण में इस प्रकार की अनिवार्यता अनुचित प्रतीत होती है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही मेरिट आधारित प्रक्रिया के तहत हुई है और उन्होंने शिक्षा के स्तर में सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सिंह ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय महाराष्ट्र से संबंधित था, न कि मध्यप्रदेश से।

उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह शिक्षकों का पक्ष अदालत में मजबूती से रखे, अंतिम निर्णय तक इस आदेश को स्थगित करे और शिक्षकों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

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