गुवाहाटी | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम के ग्वालपाड़ा और कामरूप जिलों में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए राज्य के भविष्य के लिए भाजपा का ‘रोडमैप’ प्रस्तुत किया। शाह ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है, जिसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भाजपा की सत्ता में वापसी अनिवार्य है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्षी दल ने दशकों तक आदिवासियों को केवल वोट बैंक समझा, जबकि भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू के रूप में देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति दी। शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां कांग्रेस ने आदिवासियों पर केवल 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए, वहीं मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में 1.38 लाख करोड़ रुपये आवंटित कर उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है।
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि आदिवासी क्षेत्र यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को डराने के लिए अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि यूसीसी केवल यह सुनिश्चित करेगा कि किसी को चार शादियां करने की अनुमति न मिले। घुसपैठ के मुद्दे पर हमलावर होते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने असम को घुसपैठियों का “अड्डा” बना दिया था, जो गरीबों की जमीन और रोजगार छीन रहे हैं। उन्होंने जनता से वादा किया कि यदि भाजपा को पांच साल और मिलते हैं, तो प्रत्येक घुसपैठिये की पहचान कर उन्हें राज्य से बाहर निकाला जाएगा। शाह ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार ने अब तक 1.50 लाख एकड़ जमीन को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराया है।
कामरूप के पलाशबाड़ी में रैली के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और गौरव गोगोई पर तीखे हमले किए। उन्होंने भ्रष्टाचार और देश विरोधी तत्वों से कथित संबंधों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए। शाह ने आरोप लगाया कि नेहरू-गांधी परिवार ने कभी असम के वास्तविक कल्याण के बारे में नहीं सोचा और 1962 के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा किसी को भी राज्य की एक इंच जमीन नहीं हड़पने देगी। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि ‘पंजे’ पर वोट बर्बाद न करें और विकास की निरंतरता के लिए ‘कमल’ का बटन दबाएं। बता दें कि असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके लिए प्रचार अभियान अब अपने चरम पर पहुंच गया है।

