कंडम गाडिय़ों से अवैध तरीके से संचालित हो रही ड्राइविंग की पाठशाला

शाजापुर। शाजापुर में कार सिखाने के नाम पर आधा दर्जन वो गाडिय़ां दौड़ रही हैं, जो सरकार की नजर में कंडम हो चुकी हैं. अन्य प्रांतों से पासिंग गाड़ी से कार ड्राइविंग का स्कूल चल रहा है. जिनके पास न तो बीमा है, न ही फिटनेस सर्टिफिकेट है. यहां तक कि बिना टैक्सी परमिट के शहर की सडक़ों पर कार चलाना सिखाया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर कार ड्राइविंग की ये पाठशाला शहर में किसी दिन साम्प्रदायिक तनाव भी पैदा कर सकती है. या यूं कहें कि लव जिहाद की पाठशाला भी बन सकती है.

गौरतलब है कि शाजापुर शहर में कार ड्राइविंग का बोर्ड लगाकर शहर की सडक़ों पर गाडिय़ां दौड़ाई जा रही हैं. इन गाडिय़ों की स्थिति यह है कि ये भंगार हैं. किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, क्योंकि अधिकांश गाडिय़ां गैस से चलाई जा रही हैं. जिसकी अनुमति न तो परिवहन विभाग से है और न ही यातायात पुलिस के पास इसकी कोई जानकारी है. 15साल से पुरानी जिन गाडिय़ों के मॉडल कंपनी ने बंद कर दिए, उनसे चलाए जा रहे हैं कार ड्राइविंग के स्कूल. जबकि नियमानुसार कार ड्राइविंग स्कूल के लिए गाड़ी की कंडीशन अच्छी होना चाहिए. टैक्सी परमिट होना चाहिए. साथ ही गाड़ी के सभी कागजात वैलिड होना चाहिए. कार ड्राइविंग के समय यदि कोई घटना घटित हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन. क्योंकि अधिकांश गाडिय़ां पुराने मॉडल की हैं, जो अन्य प्रांतों से ली गई हैं.

परिवहन-पुलिस के पास नहीं है कोई रिकॉर्ड

शहर में चल रहे कार ड्राइविंग स्कूल की जानकारी न तो थाने पर है, न परिवहन विभाग के पास है और न यातायात विभाग के पास है. कई महिलाएं और लड़कियां कार चलाना सीख रही हैं, जिन्हें सुनसान जगह पर कार चलाना सिखाया जाता है. यदि किसी दिन कोई घटना हो गई, तो इसका जिम्मेदार कौन. क्योंकि पुलिस के पास इनका कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं है और शहर में ये किसी दिन साम्प्रदायिक तनाव का कारण बन सकता है. यहां तक कि कई गाडिय़ां इन्होंने अवैध रूप से मॉडिफाइड करा रखी हैं, जो पूरी तरह से मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है.

कार ड्राइविंग स्कूल के क्या है नियम…

कार ड्राइविंग स्कूल के लिए सबसे पहले परिवहन विभाग में लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है. ड्यूअल कंट्रोल कार और प्रमाणित ट्रेनर के साथ ही सभी कानूनी दस्तावेज जरूरी हैं. आरटीओ में फॉर्म 10 के माध्यम से लाइसेंस प्राप्त किया जाता है. जो गाडिय़ां कार ड्राइविंग के लिए उपयोग की जा रही हैं, उसमें दोहरा नियंत्रण होना चाहिए. साथ ही वाहनों के लिए व्यापक बीमा जरूरी है और प्रमाणित ड्राइविंग प्रशिक्षक की आवश्यकता रहती है.

2 से 3 हजार रूपए लेते है गाड़ी सिखाने की फीस

कार सिखाने के लिए 2 से 3 हजार रुपए लिए जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकांश कार ड्राइविंग गाडिय़ां या तो गैस से संचालित हो रही हैं, जो किसी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है. क्योंकि घरेलू गैस भरकर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. साथ ही जनता की जान से खिलवाड़ भी किया जा रहा है. शहर में अवैध रूप से कार ड्राइविंग गाडिय़ां दौड़ रही हैं, जो किसी दिन विवाद का कारण बन सकती है. क्योंकि गाडिय़ों की स्थिति इतनी भंगार है कि कभी भी दुर्घटना हो सकती है.

इनका कहना है

बिना कागज और टैक्सी परमिट के कार ड्राइविंग स्कूल में जो गाडिय़ां चल रही हैं, उनकी जांच की जाएंगी. यदि गाडिय़ां अवैध रूप से संचालित हो रही हैं, तो उन्हें जब्त किया जाएगा.

– सौरभ शुक्ला, यातायात प्रभारी, शाजापुर

शाजापुर जिले में किसी भी कार ड्राइविंग स्कूल का लाइसेंस नहीं है. बिना टैक्सी परमिट के कार ड्राइविंग स्कूल संचालित नहीं किया जा सकता है. साथ ही 15 साल से पुरानी गाड़ी पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस मामले में कार्यवाही की थी. आगे भी कार्यवाही की जाएगी.

– रीना किराड़े, जिला परिवहन अधिकारी, शाजापुर

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