
भोपाल। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दोषी करार दिए जाने और उनकी सदस्यता समाप्त होने के मुद्दे पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस देश में संवैधानिक प्रक्रियाओं का लगातार विरोध करती रही है और अब भ्रष्टाचार के मामलों में भी संविधान की आड़ लेकर गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
सारंग ने आरोप लगाया कि एक ओर कांग्रेस के नेता संविधान बचाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास करते हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे गैर-संवैधानिक तरीके से विधानसभा में प्रवेश कर कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर रहे थे, जो पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजेंद्र भारती का मामला किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं, बल्कि यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है। सारंग के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में यह कथित अनियमितताएं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारती ने अपनी माता के खाते के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और न्यायालय को गुमराह करने का भी प्रयास किया।
मंत्री ने बताया कि दिल्ली की अदालत ने गुण-दोष के आधार पर भारती को दोषी ठहराया और मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल तिहाड़ जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है और वह छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ सकता।
सारंग ने कांग्रेस पर धारा 8(4) को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस मामले के फैसले के बाद इस प्रावधान को निरस्त कर दिया गया था। ऐसे में भारती के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह विधिसम्मत और न्यायसंगत है।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में लिया गया निर्णय कानून के अनुरूप है और इस पूरे मामले में कोई स्थगन (स्टे) भी नहीं है। साथ ही, जीतू पटवारी और पीसी शर्मा के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में कार्रवाई की मांग भी की।
सारंग ने अंत में कहा कि भ्रष्टाचार करने वाला कोई भी व्यक्ति विधानसभा में बैठने के योग्य नहीं है और कानून के तहत हुई कार्रवाई का सम्मान किया जाना चाहिए।
