बागेश्वर धाम का दिव्य दरबार: 21 हजार भक्तों ने एक साथ उतारी महाआरती

छतरपुर: बुंदेलखंड की पावन धरा स्थित सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व अभूतपूर्व उत्साह और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही समूचा धाम बालाजी महाराज के जयकारों और महाआरती की गूँज से सराबोर हो उठा। देश-दुनिया के कोने-कोने से पहुँचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया।
पंचामृत अभिषेक और अलौकिक महाश्रृंगार उत्सव का शुभारंभ तड़के षोडशोपचार पूजन के साथ हुआ। विद्वान आचार्यों के सानिध्य में गाय के पवित्र दूध और पंचामृत से बालाजी सरकार का महाभिषेक किया गया। इसके पश्चात सुगंधित पुष्पों और स्वर्ण-रजत आभूषणों से प्रभु का अलौकिक महाश्रृंगार हुआ। जैसे ही दर्शनों के लिए पट खुले, भक्तों की लंबी कतारें ‘जय सियाराम’ के नारों से गूँज उठीं। बालाजी को 56 भोग, विशेष मिठाइयों और ताजे फलों का नैवेद्य अर्पित किया गया।
भक्तों के लिए बढ़ाया गया दर्शन का समय
श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और भीषण गर्मी को देखते हुए धाम प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक बड़ा निर्णय लिया। कतार में लगे अंतिम व्यक्ति तक दर्शन पहुँचाने के उद्देश्य से पट बंद होने का समय सामान्य से एक घंटे अधिक बढ़ा दिया गया। प्रबंधन के इस फैसले से दूर-दराज से आए हजारों भक्तों ने राहत की सांस ली और अपने आराध्य की मनमोहक छवि के दर्शन किए।
पुंडरीक गोस्वामी का सानिध्य और 21 हजार दीपों की जगमगाहट जन्मोत्सव की संध्या बागेश्वर धाम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई।

विशेष कार्यक्रम के तहत प्रख्यात कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी जी का आशीर्वचन हुआ, जिसके बाद भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। उत्सव का सबसे भावुक और भव्य क्षण वह था, जब 21 हजार श्रद्धालुओं ने एक साथ मिलकर हनुमान जी की महाआरती की। दीपों की रोशनी और हजारों कंठों से निकलती आरती की स्वर लहरियों ने पूरे क्षेत्र को किसी दिव्य लोक में परिवर्तित कर दिया।

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