
मालदा | : पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक क्षेत्र में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भारी हिंसा और तनाव देखा गया। उग्र प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने बीडीओ (BDO) कार्यालय पर धावा बोलकर वहां मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद एसआईआर प्रक्रिया के तहत साजिश के तहत उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 पर टायर जलाकर और फर्नीचर रखकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया, जिससे पूरे इलाके में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई।
आधी रात को पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन
जैसे-जैसे समय बीतता गया, भीड़ और अधिक उग्र हो गई और कार्यालय पर पथराव शुरू कर दिया। अंदर फंसे अधिकारियों की जान बचाने के लिए जिला पुलिस के आला अधिकारियों को भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभालना पड़ा। बुधवार की पूरी रात तनावपूर्ण रहने के बाद, गुरुवार तड़के पुलिस ने एक विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी सात अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाव कार्य के दौरान भी उग्र भीड़ ने पुलिस के काफिले पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया है और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
चुनाव से पहले गहराया राजनीतिक टकराव
राज्य में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले इस घटना ने सियासी गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुकांत मजूमदार ने इस हिंसा के लिए राज्य सरकार के बयानों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सत्ताधारी दल चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और इस हंगामे के पीछे विपक्षी दलों की साजिश हो सकती है। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और निर्वाचन आयोग स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
