मंडला:सावन के पावन महीने में जब वातावरण हरियाली, वर्षा और उमंग से भरपूर होता है, ऐसे में कोहरे की चादर ने इस बार मौसम का मिजाज ही बदल डाला। शनिवार और रविवार की सुबह मंडला जिले में चारों ओर घना कोहरा छाया रहा। सूर्योदय से पहले ही ऐसा दृश्य बना मानो सर्दी का महीना दस्तक दे चुका हो। सूर्यकुंड धाम रोड, पुरवा सकवाह सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ों, सड़कों और खेतों पर सफेदी की परत बिछ गई। यह नजारा तो मनमोहक था लेकिन मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए चिंता का कारण भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सावन में कोहरे का यूं छा जाना सामान्य नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है। वायुमंडलीय नमी, तापमान में असमानता और दबाव के बदलाव से ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। कृषि वैज्ञानिक भी इस बदलाव को चिंताजनक मानते हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती-किसानी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। फसलों की वृद्धि में बाधा, बीमारियों की आशंका और उत्पादन में गिरावट संभव है।
कोहरे का यह असमय आना ग्लोबल वॉर्मिंग, अंधाधुंध वनों की कटाई, बढ़ते प्रदूषण और लगातार बदलते मौसम चक्र का परिणाम माना जा रहा है। सावन में जब बादलों और वर्षा का बोलबाला होना चाहिए, तब कोहरे की मोटी चादर यह दर्शा रही है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि इंसानों के लिए भी सतर्क रहने का संकेत है।
इस प्राकृतिक बदलाव को हल्के में लेना नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अब हमें प्रकृति के प्रति सजग होना होगा। वनों का संरक्षण, प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ठोस प्रयास जरूरी हैं।सावन के इस बदले स्वरूप ने जहां एक ओर प्रकृति प्रेमियों को अद्भुत नजारा दिया, वहीं यह संदेश भी दिया कि मौसम के बदलते तेवरों के बीच अब जागरूकता और सतर्कता बेहद आवश्यक है।
