भोपाल: नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिन 31 मार्च को 12 करोड़ रुपए का संपत्तिकर प्राप्त हुआ जो पूरे साल में एक दिन का सबसे अधिक है. इसके लिए जहां शासन ने लोक अदालत की छूट को जारी रखा था. वहीं निगम ने संपत्तिकर अधिक प्राप्त करने के लिए खूब प्रचार प्रसार किया था. इतना सब कुछ करने के बाद भी पूरे साल में लगभग 282 करोड़ रुपए का संपत्तिकर मिल सका है. पिछले वर्ष लगभग 258 करोड़ मिला था. जबकि इस वित्तीय वर्ष में निगम का लक्ष्य लगभग चार सौ करोड़ का रखा गया था. वहीं निगम की डिमांड लगभग आठ सौ करोड़ की थी.
साढ़े पांच लाख संपत्ति पंजीकृत:
नगर निगम सीमा में प्रतिवर्ष लगभग 15 प्रतिशत संपत्तियां बढ़ती जा रही हैं जो शहर में लगभग 5.50 लाख संपत्तियां पंजीकृत हो चुकी हैं. इन पंजीकृत संपत्तियों का लगभग 35 प्रतिशत संपत्ति कर प्राप्त हुआ है. अगर सभी संपत्तियों के कर की वसूली हो जाती तो निगम को लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त हो जाता. जो नहीं हुआ.
पंजीकृत संपत्तियों पर होती है डिमांड:
नगर निगम की प्रतिवर्ष संपत्तिकर की डिमांड राशि तय होती है. जिसका आंकलन पंजीकृत संपत्तियों से प्राप्त होने वाले कर के आधार पर होता है. वर्तमान में नगर निगम सीमा में आने वाली जितनी संपत्तियां दर्ज हैं.उसके आधार पर लगभग 8 सौ करोड़ की डिमांड थी.
डिमांग का आधा रखा था लक्ष्य
सूत्रों के अनुसार प्रतिवर्ष नगर निगम संपत्तिकर वसूली के लिए अनुमानित लक्ष्य रखता है, जो निगम की डिमांड का आधा रखा जाता है. उसका प्रमुख कारण है कि निगम ने कभी लक्ष्य को ही पूरा नहीं किया तो फिर डिमांड को पूरा करना संभव ही नहीं होता है.
इनका कहना है
निगम ने अनुभवहीन कर्मचारियों को संपत्तिकर वसूली के लिए लगा रखा था. वहीं, चार कर्मचारी संभल घौटाले के आरोपियों को भी इस कार्य में लगा रखा था. तो उन्होंने कार्य ही नहीं किया. मेहनती कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया ही नहीं तो संपत्तिकर की वसूली कैसे होती.
शबिस्ता जकी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम भोपाल
