जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के एकात्म भवन में महाकौशल विचार मंच (प्रज्ञा प्रवाह) एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “भारतबोध” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक दृष्टि का विकास करते हैं।मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह-संयोजक विनय दीक्षित ने “भारतबोध” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत को जानना, समझना और उसके मूल्यों को आत्मसात करना ही सच्चे राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि धर्म का वास्तविक अर्थ ‘धारण करना’ और ‘कर्तव्य का निर्वहन’ है।
“सत्यम, शिवम्, सुंदरम्” की अवधारणा प्रस्तुत
अपने उद्बोधन में उन्होंने “सत्यम, शिवम्, सुंदरम्” की अवधारणा को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। साथ ही विद्यार्थियों से संवाद करते हुए निर्णय और समय के महत्व के बीच सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट किया। उनका संबोधन ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ गहन चिंतन को प्रेरित करने वाला रहा। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए।कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. सुरेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया, जबकि मंच संचालन डॉ. निखिल चौरसिया ने कुशलतापूर्वक किया।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में महाकौशल प्रांत संयोजक एड. राकेश सिंह, प्रो. राकेश बाजपेयी, डॉ. अश्वनी जायसवाल, डॉ. आशा रानी, डॉ. अजय मिश्रा, डॉ. धीरेंद्र मौर्य, डॉ. रिंकेश भट्ट एवं कामता प्रसाद मिश्रा की विशेष उपस्थिति रही। विद्यार्थियों में शालिनी सिंह, दीपांश गुप्ता, साक्षी सहवाल, कन्हैया चौकसे, संतोष सेंगर, खुशी पटेल, पल्लवी यादव, मानस श्रीवास्तव, अनीशा प्रजापति, श्रृष्टि रजक, हिमांशु एवं वरद राय की सक्रिय सहभागिता उल्लेखनीय रही।
