रीवा: नगर निगम रीवा का 17 वां स्थगित साधारण सम्मिलन मंगलवार को सम्पन्न हुआ. जहा वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्यय को लेकर चर्चा की गई. पक्ष और विपक्ष के पार्षदो ने बजट को लेकर अपने-अपने सुझाव दिये. वही बजट की कमियों को विपक्ष ने उजागर किया. बजट को लेकर मैराथन बैठक के दौरान कई विषयों को लेकर नोकझोक भी हुई.परिषद अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय की अध्यक्षता एवं महापौर अजय मिश्र बाबा, निगम आयुक्त डा. सौरभ सोनवणे की मौजूदगी में बैठक पर विस्तृत चर्चा की गई. विपक्ष ने बजट को केवल आकड़ो का खेल बताया और सवाल उठाते हुए जवाब मांगा. जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने बैठक का बहिर्गमन किया.
वही बजट जैसे अहम बैठक से कई पार्षद नदारत रहे. आय-व्यय में 109 लाख का अंतर रहा. पार्षदगणों द्वारा दिये गये सुझावों, संशोधनों एवं प्रावधानों का सम्मिलित करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-2027 का बजट परिषद में अंगीकार किया गया. अंत में वित्त एवं लेखा विभाग के प्रभारी सदस्य रवि तिवारी ने परिषद के अध्यक्ष एवं सभी पार्षदगणों के प्रति आभार व्यक्त किया. सर्वप्रथम वित्तीय वर्ष 2026-2027 के आय-व्यय पत्रक पर पार्षद राजीव शर्मा, अख्तर अली, श्रीमती ज्योति प्रदीप सिंह, श्रीमती पूजा प्रमोद सिंह, विधायक प्रतिनिधि विवेक दुबे, अंबुज रजक, श्रीमती ज्योति कबीर पासा, सजंय खान, सूरज केवट समीर शुक्ला, सालिकराम नापित, श्रीमती अर्चना शिवदत्त पाण्डेय एवं दीनानाथ वर्मा ने अपने सुझाव, प्रश्न एवं वक्तव्य प्रस्तुत किये.
एमआईसी सदस्य धनेंद्र सिंह बघेल ने परिषद में बजट में आए सुझावों और शंकाओं, प्रश्नों का जवाब दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि नगर पालिक निगम परिषद की बैठक में बजट चर्चा के दौरान पालन प्रतिवेदन को लेकर चर्चा पर भी उन्होंने जवाब दिया. पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की मांग पर प्रभारी सदस्य, मेयर-इन-काउंसिल धनेन्द्र सिंह ने नियमों और अधिनियमों का हवाला दिया. उन्होने कहा कि परिषद द्वारा सर्वसम्मति या बहुमत से पारित कोई भी प्रस्ताव निगम का निर्णय होता है, जिसका क्रियान्वयन कराने का अधिकार आयुक्त में निहित है. ऐसे सभी निर्णयों का समावेश आगामी वर्ष के बजट में किया जाता है, जिसकी जानकारी सभी पार्षदों को उपलब्ध रहती है. उन्होने स्पष्ट किया किसी भी सदस्य के कहने मात्र से परिषद में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान नही है.
बजट में नागरिको की सीधी सहभागिता: महापौर
बजट पर महापौर अजय मिश्रा बाबा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को जनसहभागिता, संतुलन और विकास पर आधारित बताया. उन्होंने कहा कि यह छठवीं परिषद का चैथा बजट है, जिसे वित्त एवं लेखा विभाग के प्रभारी सदस्य रवि तिवारी द्वारा परिषद के समक्ष रखा गया है. इस वर्ष बजट में कोई नया कर प्रस्तावित नहीं किया गया है.महापौर ने कहा कि बजट निर्माण में शहर के नागरिकों की सीधी सहभागिता, उनके सुझाव एवं मार्गदर्शन को शामिल किया गया है. समाज के सभी वर्गों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लोकलुभावन प्रावधानों से दूर रहकर व्यावहारिक एवं जनोपयोगी बजट तैयार किया गया है.
उन्होंने बताया कि आय-व्यय के अंतर में निरंतर सुधार हुआ है. वर्ष 2024-25 में यह अंतर 7019.62 लाख रुपए था, जो 2025-26 में घटकर 1321.86 लाख हुआ और वर्ष 2026-27 में इसे घटाकर मात्र 109.96 लाख कर दिया गया है, जो निगम की मजबूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है.महापौर ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में वार्डों के समुचित विकास के लिए 118.90 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो विगत वर्ष से 48.90 करोड़ अधिक है. इससे उन वार्डों में विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां विकास कार्य अभी पूर्ण रूप से नहीं हो पाए हैं. उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों के कल्याण, उनके हितों की रक्षा एवं नगरीय निर्धनता के उन्मूलन के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं
नगर के विकास, सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, सीवरेज, जलाशयों के पुनरोद्धार, परिवहन व्यवस्था, वॉटर एटीएम सहित नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के व्यापक प्रावधान बजट में किए गए हैं. महापौर ने नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शासन के समक्ष विस्तृत सुझाव रखते हुए कहा कि शहर की नजूल भूमियों को निजी आवंटन के बजाय अधिनियम की धारा 81-अ के तहत नगर निगम को हस्तांतरित किया जाना चाहिए, ताकि निगम स्वयं आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित कर अपनी आय के स्थायी स्रोत बना सके. साथ ही, वर्तमान में अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित पुनर्घनत्वीकरण योजनाओं को नगर निगम के माध्यम से क्रियान्वित कराया जाना चाहिए, क्योंकि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं निगम ही उपलब्ध कराता है, जिससे निगम की आय में सीधा लाभ सुनिश्चित होगा. नगर निगम शहर की सडक़ों के साथ अन्य विभागों की सडक़ों का भी रखरखाव करता है, लेकिन इसके लिए मिलने वाला अनुदान अपर्याप्त है, अनुरक्षण मद में राशि बढ़ाई जाय.
प्रतिमा को लेकर विपक्ष का वाकआउट
बजट को लेकर मैराथन बैठक में विभिन्न विषयों को लेकर चर्चा हुई और जब प्रतिमा लगाने को लेकर चर्चा शुरू हुई तो विपक्ष सदन से हंगामा करते हुए वाकआउट कर दिया. शहर में महापुरुषों की प्रतिमाओं की सूची में पूर्व सीएम स्व. कुंवर अर्जुन सिंह का नाम नहीं रखने को लेकर भाजपा के पार्षदों ने हंगामा किया और महापौर अजय मिश्रा बाबा का जबाव सुनने से पहले ही सदन से वाकआउट कर गए. दीनानाथ वर्मा ने इसे अपमान बताया, इसके जबाव में महापौर ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई तथा महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव सहित अन्य महान विभूतियों की प्रतिमाओं की स्थापना की प्रक्रिया जारी है. अंत में परिषद में बजट अंगीकार किए जाने पर वित्त एवं लेखा सदस्या रवि तिवारी ने बजट और उसमें निहित जनहितैषी योजनाओं पर चर्चा की.
पौधरोपण-सीवरेज निर्माण को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
बजट की चर्चा के दौरान वाहन की उपलब्धता, इस्तेमाल और उनके मेंटेनेंस, पद्मधर पार्क के निर्माण की गुणवत्ता और पौधरोपण पर कई सवाल उठाए गए. चर्चा में शामिल राजीव शर्मा, ज्योति सिंह, पूजा सिंह, विधायक प्रतिनिधि विवेक दुबे, अंबुज रजक, ज्योति कबीर पासा, सजंय खान, सूरज केवट समीर शुक्ला, सालिकराम नापित, अर्चना शिवदत्त पाण्डेय एवं दीनानाथ वर्मा ने इन मुद्दों पर महापौर से जबाव मांगा. पार्षदों का कहना था कि बजट से शहर के लोगों को गुमराह किया जा रहा है. इतने बड़े पैमाने पर रोपे गए पौधे कहां गायब हो गए. सीवरेज की खुदाई दौरान निकला कंक्रीट, छड़ें कहां गई. वाहनों के मामले में पार्षद राजीव शर्मा ने परिषद अध्यक्ष वेंकटेश पांडेय को आवेदन देकर एफआईआर कराने की मांग की.
