
सिंगरौली। सीधी-सिंगरौली नेशनल हाईवे-39 पिछले 13 वर्षों से निर्माणाधीन है और अब एक बार फिर यह परियोजना गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। मार्च महीने में तीसरी बार फोरलेन सड़क का टेंडर होने के बीच गोरबी के समीप नोढीया स्थित ओवरब्रिज के एक हिस्से को ध्वस्त कर तोड़े जाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। लाखों रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज को अब तोड़कर दोबारा निर्माण करने की नौबत आने से एमपीआरडीसी के अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ओवरब्रिज शुरुआत से ही तकनीकी खामियों से ग्रस्त था। सबसे बड़ी समस्या इसकी टर्निंग को लेकर बताई जा रही है। यहां मोड़ इस तरह से तैयार किया गया था कि बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही में दिक्कत आ सकती थी। लंबे समय से इस मार्ग पर चलने वाले वाहन चालकों ने भी कई बार इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब पुल के एक हिस्से को तोड़ा जा रहा है तो यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि आखिर इतनी बड़ी खामी इतने वर्षों तक नजर से कैसे ओझल रही। जानकारी के अनुसार फरवरी महीने में सड़क निर्माण से जुड़े तकनीशियन, इंजीनियर और विशेषज्ञों की एक टीम वाराणसी, दिल्ली और अन्य शहरों से यहां पहुंची थी। टीम ने निर्माणाधीन फोरलेन सड़क और नौढ़िया ओवरब्रिज का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी कमियां सामने आईं, जिनमें ओवरब्रिज की टर्निंग और संरचना प्रमुख बताई जा रही है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही पुल के एक हिस्से को तोड़ने का निर्णय लिया गया और पिछले एक पखवाड़े से निर्माणाधीन ओवरब्रिज के एक हिस्से को तोड़ा जा रहा है और उसमें लगे सरिया को 25 रूपये केजी के हिसाब से बेच दिया जा रहा है। अब सवाल उठाया जा रहा है कि प्राकलन के समय इसपर ध्यान क्यों नही दिया गया। यदि तीसरी बार टेंडर न हुआ होता तो शायद ओवरब्रिज बन भी जाता। अब स्थानीय ग्रामीण मांग करने लगे हैं एमपीआरडीसी के इंजीनियरों पर कार्रवाई कर राशि की रिकवरी कराई जाए।
एमपीआरडीसी के पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल
स्थानीयजनों का कहना है कि सरकारी धन से लाखों रुपये खर्च कर ओवरब्रिज बनाया गया। हालांकि वह निर्माणाधीन है। अब उसी पुल को तोड़ने में फिर से लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और उस समय पदस्थ अधिकारियों, इंजीनियरों तथा ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। सीधी-सिंगरौली एनएच-39 क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है, लेकिन 13 वर्षों से अधूरा निर्माण और अब ओवरब्रिज की तकनीकी खामी ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमजन की मांग है कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो सके।
इंजीनियरों पर कार्रवाई करने की उठने लगी मांग
अब सबसे बड़ा सवाल एमपीआरडीसी के उन अधिकारियों और इंजीनियरों पर खड़ा हो रहा है जो पिछले 12 से 13 वर्षों के दौरान इस परियोजना से जुड़े रहे। यदि निर्माण प्राक्कलन के अनुरूप नहीं हुआ था तो उस समय पदस्थ इंजीनियर और सब-इंजीनियर ने इसे क्यों नहीं रोका, यदि ठेकेदार ने मनमानी करते हुए गलत निर्माण किया तो गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी स्वीकृति देने वाले अधिकारियों ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की।
