
छिंदवाड़ा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेडियो कॉलर लगे बाघ की मौत किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का नतीजा निकली। जांच में खुलासा हुआ है कि छातीआम बीट के जंगल में अवैध अफीम की खेती कर रहे आरोपियों ने अपनी करतूत छिपाने के लिए बाघ को जहर देकर मार डाला।
वन विभाग के अनुसार, इलाके में बाघ की लगातार मूवमेंट के कारण कभी भी टीम वहां पहुंच सकती थी, जिससे अफीम की खेती उजागर होने का खतरा था। इसी डर से आरोपियों ने बाघ के शिकार किए गए मवेशी के शव में यूरिया और कीटनाशक मिला दिया। कुछ समय बाद जब बाघ वापस शिकार खाने लौटा, तो जहरीला मांस खाने से उसकी मौत हो गई।
वारदात के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। उन्होंने बाघ और मवेशी दोनों के टैग लगे कान काटकर जला दिए और शवों को अलग-अलग जगह दफना दिया। हालांकि, रेडियो कॉलर की सैटेलाइट लोकेशन से वन विभाग को संदेह हुआ और सर्चिंग के दौरान डॉग स्क्वॉड की मदद से बाघ का शव बरामद कर लिया गया।
मामले में उदेसिंग, बिसनलाल, मनोहर सिंह और कैलाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया कि अवैध अफीम की खेती का मामला पुलिस को सौंप दिया गया है, जिसकी कीमत करीब 30 लाख रुपए आंकी गई है।
