जहर के बढ़ते मामलों पर एम्स में मंथन: त्वरित इलाज और नई पद्धतियों से बच सकती है जान

भोपाल:आम लोंगों के जीवन में गंभीर परेशानियों और जहर लेकर जानलेवा वाली स्थितियों के लिये एम्स में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया. सत्र का विषय समेकित विष विज्ञान रखा गया. सत्र में फॉस्फीन उत्सर्जित करने वाले जहर जैसे एल्युमिनियम फॉस्फाइड और जिंक फॉस्फाइड पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि आज भारत में जहर कई गंभीर और जानलेवा मामलों का कारण बनता जा रहा है।

कार्यक्रम में डॉ. एस. हरि ने फॉस्फाइड के बढ़ते उपयोग को बताते हुये कहा कि इसमें जानलेवा स्थितियों में कानूनी महत्व भी बहुत अधिक होता है. वहीं डॉ. आयशा ने शरीर के अंदर जहर कैसे एसर करता है और कितनी देर में किस हद तक असर करता है, कितना नुकसान पहुंचता है ऐसी परिस्थितियों को समझाया. इसके बाद डॉ. मेहता ने इसके लक्षणों और आपातकालीन स्थिति में क्या करना चाहिए बताते हुये कहा कि ऐसे मामलों में देरी नहीं करनी चाहिए और मरीज का तुरंत अस्पताल पहुंचना बहुत जरूरी है।

कार्यक्रम में शामिल डॉ अंसिल एम ने इसके इलाज के बारे मे बताते हुये कहा कि नई उपचार पद्धतियों से मरीजों को बेहतर राहत मिल सकती है। वहीं डॉक्टरों ने जहर से होने वाली मृत्यु के बाद की जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही डॉ. जय कुमार चौरसिया ने बताया कि जहर के कारण शरीर के अंदर सूक्ष्म स्तर पर होने वाले बदलाव के बारे में बताया.
कार्यक्रम में संस्थान के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ डॉ माधवानन्द कर ने इसे विष विज्ञान शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं इस अवसर पर अकादमिक डीन प्रो. रजनीश जोशी, न्याय चिकित्सा एवं विष विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ अर्नीत अरोड़ा, औषधि विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ बालकृष्णन एस, जनरल मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विष्णु नारायण मिश्रा डॉ. अतुल एस. केचे और डॉ. निरंजन साहू के साथ विभिन्न विभागों के छात्र, रेजिडेंट्स और फैकल्टी ने सक्रिय भागीदारी की।

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