इंदौर: प्रदेश कांग्रेस ने आज इंदौर शहर कांग्रेस कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. शहर कार्यकारिणी में 52 नेताओं को स्थान दिया गया है. खास बात यह है कि इस बार कार्यकारिणी में वरिष्ठ नेताओं को स्थाई और विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है. विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि कार्यकारिणी में ज्यादातर युवाओं के साथ जातिगत समीकरण का भी ध्यान रखा गया है।वही कमेटी में हाईकमान के निर्देशों की सख्ती साफ नजर आ रही है.
मध्यप्रदेश कांग्रेस में हाईकमान के निर्देशों का संगठन में सख्ती से पालन शुरू हो गया है. संगठन सृजन अभियान के दौरान ही हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया था कि बड़े जिलों और शहरों में 52 और छोटे शहरों में 22 सदस्यीय कमेटी बनेगी. यही कारण है कि इंदौर शहर की कार्यकारिणी में हाईकमान के निर्देश पर 52 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. शहर कमेटी में 10 उपाध्यक्ष, 18 महामंत्री, 18 सचिव, कोषाध्यक्ष, दो प्रवक्ता और दो सोशल मीडिया प्रभारी बनाए गए है.
कार्यकारिणी में जातिगत समीकरण और वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बैठाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. कमेटी की सबसे बड़ी और आश्चर्यजनक कमी यह है कि एक भी महिला नेत्री को कार्यकारिणी में स्थान नहीं दिया गया है. कमेटी में उपाध्यक्ष पद पर प्रवेश यादव, मुकेशपुरी और गोविंद परिहार, गुलाब सोनकर जैसे नेताओं को जगह मिली है. वहीं महामंत्री अभिजीत (बिट्टू) भंवर शर्मा, विनोद चौकसे, मुकेश यादव जैसे युवाओं को जिम्मेदारी दी गई है. वहीं प्रवक्ता दीपू चौहान और लोकेश हार्डिया को बनाया गया है. दोनों युवा है और शहर के मुद्दों पर जानकारी रखते हैं.
संगठन की सख्ती का असर
वैसे देखा जाए तो प्रमोद टंडन ने 2008 में शहर कांग्रेस कमेटी घोषित की थी, फिर 2017 में विनय बाकलीवाल ने कार्यकारिणी बनाई थी. यह बात ओर है कि टंडन और बाकलीवाल की कार्यकारिणी जंबो थी, जिसमें हर पद पर 50 से ज्यादा नेताओं की भीड़ थी. शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत चड्डा बिना कमेटी के अध्यक्ष रहे, जो कमेटी नहीं बना पाए. चिंटू चौकसे, कृपा पंडित के बाद पहले अध्यक्ष है, जिन्होंने कांग्रेस संगठन और नियमों के तहत कार्यकारिणी घोषित बनाई है. यूं कहा जा सकता है कि संगठन की सख्ती का असर कमेटी में साफ नजर आ रहा है. शहर कमेटी में सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि किसी भी महिला को स्थान नहीं दिया गया है
