जबलपुर: एमपी स्टेट बार काउंसिल की नवीन कार्यकारिणी के चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। इससे पूर्व विगत दिनों प्रारंभिक मतदाता सूची जारी की गई। हाईकोर्ट व जिला बार के पदाधिकारियों ने सैकड़ों वकीलों के साथ चुनाव अधिकारी व सचिव के समक्ष पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप है कि 2026 की प्रारंभिक मतदाता सूची 2019 की र्फाइनल लिस्ट को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है। यदि इस गलती का समय रहते सुधार नहीं हुआ तो वकील प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन, सचिव परितोष त्रिवेदी व जिला बार अध्यक्ष मनीष मिश्रा, सचिव ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि जो प्रारंभिक मतदाता सूची जारी की गई है, उसमें प्रदेश के हजारों अधिवक्ताओं के नाम जुडऩे से वंचित रह गए हैं। जिस पर दावे-आपत्ति हेतु समय कम से कम 15 दिन बढ़ाया जाए। साथ ही जिन अधिवक्ताओं के नाम नहीं जुड़े हैं, उनके नाम जोडऩे की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। दरअसल, एमपी स्टेट बार के 2019 के इलेक्शन की जो प्रारंभिक मतदाता सूची जारी हुई थी, उसके आधार पर 2026 की लिस्ट तैयार की गई है, 2019 की फाईनल लिस्ट को ध्यान में नहीं रखा गया। यदि किसी भी अधिवक्ता को जो मतदान करने हेतु पात्र है, उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया तो वकील आंदोलित हो जाएंगे। स्टेट बार चुनाव एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश व दो पूर्व हाईकोर्ट जजों के मार्गदर्शन में हो रहा है, इसलिए पारदर्शिता अपेक्षित है।
