बीजिंग, 20 मार्च (वार्ता) चीन ने शुक्रवार को विक्रम के दोरईस्वामी की देश में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्ति का स्वागत किया और राजनयिकों को ‘देशों के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण पुल’ बताया। विदेश मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री दोरईस्वामी, जिन्होंने चीनी नाम ‘वेई जियामेंग’ अपनाया है, कार्यभार संभालने के बाद सकारात्मक योगदान देंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि विदेशी राजनयिकों के चीनी नाम रखने से बातचीत में सहजता और तालमेल बढ़ता है।” उन्होंने कहा, “चीन, भारत के नवनियुक्त राजदूत ‘वेई जियामेंग’ का स्वागत करता है और उन्हें चीन में अपना पद संभालने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान करने को तैयार है। चीन को उम्मीद है कि कार्यभार संभालने के बाद वह चीन-भारत संबंधों के निरंतर सुधार और विकास को आगे बढ़ाने में सकारात्मक योगदान देंगे।”
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1992 बैच के अधिकारी दोरईस्वामी इससे पहले बंगलादेश में भारत के उच्चायुक्त और उज्बेकिस्तान तथा दक्षिण कोरिया में राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने सितंबर 2022 में ब्रिटेन (यूके) में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। वह चीनी भाषा में पारंगत हैं और उन्होंने 1996 से बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में और 1994 में हांगकांग में तीसरे सचिव के रूप में कार्य किया है।
लंदन में अपने कार्यकाल के दौरान श्री दोरईस्वामी को खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं का सामना करना पड़ा था, जिसमें मार्च 2023 में भारतीय उच्चायोग में तोड़फोड़ का प्रयास और सितंबर 2023 में ग्लासगो के एक गुरुद्वारे में उनके प्रवेश में बाधा डालना शामिल था। भारत ने इन दोनों घटनाओं पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। ब्रिटेन के साथ संबंध, जो तनावपूर्ण हो गये थे, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की लेबर सरकार में अब सुधरे हैं। यह नियुक्ति रणनीतिक मोड़ पर हुई है, क्योंकि भारत-चीन संबंध मजबूत हो रहे हैं। अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों में काफी सुधार आया है। यह मुलाकात पूर्वी लद्दाख में चार साल से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने वाले एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद हुई थी, जिससे 2020 की गलवान झड़प के बाद से जारी तनाव कम हुआ है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में श्री दोरईस्वामी के व्यापक अनुभव और चीन की गहरी समझ से राजनयिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

