वॉशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने कतर के ऊर्जा केंद्रों पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र को पूरी तरह नष्ट कर देगा। यह बयान ईरान द्वारा कतर की ‘साउथ पार्स’ प्राकृतिक गैस फैसिलिटी पर मिसाइल दागने के बाद आया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे पर कोई भी आंच बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए पिछले हमलों में सीधे शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन इस जुबानी जंग ने वैश्विक तेल और गैस बाजारों में जबरदस्त उथल-पुथल मचा दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद कतर के प्रमुख प्राकृतिक गैस संयंत्र में भीषण आग लग गई और संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस घटना से आक्रोशित होकर कतर सरकार ने ईरानी दूतावास के कई अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद से ईरान लगातार फारस की खाड़ी के पड़ोसी देशों की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बना रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, अब लगभग अगम्य हो चुका है। ईरान और हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर किए जा रहे ड्रोन हमलों ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडराने लगा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धाफरा हवाई अड्डे को ईरानी हमलों में भारी नुकसान पहुँचा है। इस बेस पर लगभग 2,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यह एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों का प्रमुख परिचालन केंद्र रहा है। एयरबस डिफेंस द्वारा जारी तस्वीरों में हवाई अड्डे के उत्तर-पश्चिम में स्थित हैंगर और कई महत्वपूर्ण इमारतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी सेना वर्षों तक इस बेस की गोपनीयता बनाए रखती थी, लेकिन अब सीधे हमलों ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप की ताजा धमकी के बाद यह स्पष्ट है कि यदि ईरान पीछे नहीं हटता, तो खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा बहुराष्ट्रीय सैन्य टकराव अपरिहार्य हो सकता है।

