
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और धार्मिक-सांस्कृतिक विकास को नई गति देते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाला हर श्रद्धालु प्रदेश का अतिथि होगा और उसकी सुविधा व सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 का वैभव इस बार “भूतो न भविष्यति” होगा, अर्थात ऐसा आयोजन पहले कभी नहीं हुआ और भविष्य में भी दुर्लभ रहेगा।
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगू भाई पटेल के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उज्जैन में लगभग 663 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया गया। इनमें गीता भवन और विक्रम नगर रेलवे ओवर ब्रिज सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
सनातन संस्कृति का संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ-2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सनातन संस्कृति का विश्व-समागम है, जहां देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि उज्जैन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
13 हजार 851 करोड़ की स्वीकृति
सिंहस्थ को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को स्वीकृति दी है। वर्ष 2026-27 के बजट में सिंहस्थ की तैयारियों के लिए 3 हजार 60 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है।
प्रधानमंत्री का मिल रहा सहयोग
सीएम बोले केंद्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने एन एच 752 डी के बदनावर-पेटलावद-थांदला खंड को फोर लेन बनाने की स्वीकृति दी है, जिससे उज्जैन का संपर्क दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से और मजबूत होगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
77 करोड़ 14 लाख से बनेगा गीता भवन
कार्यक्रम में 77 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से बनने वाले भव्य गीता भवन की आधारशिला रखी गई। इसके साथ ही 30 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से विक्रम नगर रेलवे ओवर ब्रिज का भूमि-पूजन भी किया गया। शहर और आसपास के क्षेत्रों में 11 नई सड़कों के निर्माण का कार्य भी शुरू किया गया है, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी।
64 कला 14 विद्या श्री कृष्ण ने यहीं सीखी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन केवल धार्मिक नगरी ही नहीं बल्कि शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का भी केंद्र रहा है। यही वह भूमि है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का अध्ययन किया और जहां से श्रीकृष्ण-सुदामा की पवित्र मित्रता की शुरुआत हुई। इसी भूमि पर धर्म, ज्ञान और संस्कृति की परंपरा आज भी जीवंत है।
