हैदराबाद | ईरान पर अमेरिका और इजराइल का संयुक्त हमला आज 18वें दिन में प्रवेश कर गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन और रॉकेट से निशाना बनाया गया है, जबकि इजराइल ने तेहरान और लेबनान की राजधानी बेरूत पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलों का नया जखीरा दागा है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। ईरान के कड़े रुख और “युद्ध शुरू अमेरिका ने किया, खत्म हम करेंगे” की चेतावनी के बाद फिलहाल संघर्ष विराम के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
ईरानी मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा, जिसका सीधा असर दुबई जैसे वैश्विक यात्रा केंद्रों पर पड़ा है। इजराइली सैन्य अभियान के कारण लेबनान में अब तक 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षकों के अनुसार, इजराइल सीमा पर अपनी थल सेना की बड़ी तैनाती कर रहा है। इस युद्ध में अब तक ईरान में 1300, लेबनान में 880 और इजराइल में 12 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अमेरिकी सेना के भी 13 सैनिक मारे गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की है, क्योंकि वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के डर से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। हालांकि, सोमवार को तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में युद्ध की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ी बढ़त देखी गई। खाड़ी देशों के तेल क्षेत्रों, विशेषकर इराक और यूएई में हुए ड्रोन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि व्यापारिक मार्गों पर बाधा जारी रही, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं।

