नई दिल्ली | भारत के स्टार बल्लेबाज और टी-20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टेस्ट क्रिकेट के प्रति अपना प्रेम जाहिर करते हुए कहा कि वह आज भी खेल के सबसे लंबे प्रारूप में खुद को साबित करना चाहते हैं। एक विशेष पॉडकास्ट में मुंबईया अंदाज में बात करते हुए सूर्या ने कहा, “मैंने 10-12 साल तक रणजी ट्रॉफी में लाल गेंद से पसीना बहाया है, मुंबई में क्रिकेट की शुरुआत ही इसी से होती है।” हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में टी-20 फॉर्मेट में उनका ‘हाथ सेट’ हो गया है और वह इस छोटे प्रारूप के उस्ताद बन चुके हैं, लेकिन मौका मिलने पर वे सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने के लिए बेहद उत्साहित रहेंगे।
वनडे क्रिकेट (50 ओवर) को लेकर सूर्यकुमार ने बड़ी स्पष्टता से अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि वह इस प्रारूप की बारीकियों को कभी पूरी तरह समझ नहीं पाए। उनके अनुसार, वनडे एक ऐसा कठिन फॉर्मेट है जहाँ आपको एक ही मैच में टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों शैलियों में बल्लेबाजी करनी पड़ती है। सूर्या ने कहा, “कभी जल्दी विकेट गिरने पर टेस्ट की तरह खेलना होता है, तो कभी अंत में टी-20 की तरह; यह मेरे लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है।” गौरतलब है कि 2023 विश्व कप फाइनल के बाद से वे इस प्रारूप से लगभग दूर ही रहे हैं।
जब दुनिया भर के दिग्गज क्रिकेटर जैसे रविचंद्रन अश्विन और वसीम अकरम वनडे क्रिकेट के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं, तब सूर्यकुमार ने इस पर संतुलित राय दी। उन्होंने माना कि वनडे का अपना एक अलग आकर्षण और गरिमा है, जिसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने 2023 वनडे विश्व कप की तैयारियों और माहौल को याद करते हुए कहा कि उस समय का अनुभव टी-20 विश्व कप से बिल्कुल अलग था। हालांकि 35 वर्ष की उम्र में टेस्ट टीम में उनकी वापसी कठिन मानी जा रही है, लेकिन सूर्या का मानना है कि किस्मत में जो लिखा है, वह मिलकर रहता है।

