मुंबई | महाराष्ट्र विधानसभा ने सोमवार को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ को पारित कर एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को सत्ताधारी महायुति के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन (MVA) में शामिल शिवसेना (UBT) का भी साथ मिला। मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष मजहब के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका एकमात्र उद्देश्य धोखाधड़ी, लालच, दबाव या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 12 अन्य राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून प्रभावी ढंग से लागू हैं।
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब उद्धव ठाकरे की पार्टी ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उद्धव ठाकरे ने सदन के बाहर कहा कि यदि कोई मजबूरी का फायदा उठाकर या झूठा लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो वे उसके खिलाफ हैं। हालांकि, कांग्रेस, एनसीपी (SP) और समाजवादी पार्टी ने इस विधेयक को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कानून धर्म की आजादी देने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास है और इसे जांच के लिए संयुक्त प्रवर समिति को भेजने की मांग की।
प्रस्तावित कानून के तहत अब जबरन धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ इसमें मदद करने वाले संगठनों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के अनुसार, पुलिस को यह अधिकार दिया गया है कि वे कथित अवैध धर्मांतरण के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकेंगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं थे, जिससे अक्सर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती थी। अब यह विधेयक विधान परिषद में पेश किया जाएगा, जहाँ से पारित होने के बाद यह पूरे राज्य में कानून का रूप ले लेगा।

