
छतरपुर। शिक्षा विभाग के एक नए आदेश ने जिले के हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के निर्देश के अनुसार जिले के लगभग 3100 प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को अगले दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यह नियम उन शिक्षकों पर लागू होगा जिन्होंने अब तक आरटीई अधिनियम के तहत अनिवार्य टीईटी परीक्षा पास नहीं की है।
बताया जा रहा है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद लागू किया जा रहा है। वर्ष 2017 में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सितंबर 2025 में निर्देश दिए थे कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक जिन्होंने अभी तक पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें दो वर्ष का अवसर दिया जाए। प्रस्तावित टीईटी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित हो सकती है। यदि निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं की गई तो संबंधित शिक्षकों की सेवा पर असर पड़ सकता है या उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय शेष है, उन्हें इस नियम से छूट मिलेगी।
इस आदेश के बाद शिक्षकों के बीच 2005 की नियुक्तियों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि उस समय भर्ती व्यापमं की परीक्षा के माध्यम से हुई थी, ऐसे में दोबारा पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना उचित नहीं है।
मप्र शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष कमल अवस्थी ने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने की मांग की है। जिला शिक्षा अधिकारी ए.एस. पॉंडिय के अनुसार जिले में लगभग 3100 ऐसे शिक्षक चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें आगामी टीईटी परीक्षा में शामिल होना होगा।
