शिवराज के साथ वीडी शर्मा व भूपेंद्र सिंह भी दोषमुक्त

जबलपुर। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार ने राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा द्वारा मानहानि का केस वापस लिए जाने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ खजुराहो सांसद वीडी शर्मा व भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह को भी दोषमुक्त कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी तन्खा की ओर से अधिवक्ता सोम मिश्रा व शिवराज सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता श्याम विश्वकर्मा खड़े हुए। दलील दी गई कि यह परिवाद चार जनवरी 2025 को दायर किया गया था। 29 अप्रैल 2023 को परिवादी के कथन अंकित किए गए थे। कोर्ट ने 20 जनवरी 2024 को शिवराज सहित अन्य के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश दिया था। किंतु इससे पहले की इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया जाता, इससे पूर्व परिवादी तन्खा की ओर से मानहानि का प्रकरण वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

 

10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग का था मामला-

यह मामला 2021 में हुए मध्य प्रदेश के पंचायत चुनावों से जुड़ा था। उन दिनों विवेक तन्खा वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक केस में पेश हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे लेकर कुछ बयान दिए थे। तन्खा का कहना था कि इन बयानों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। इसे आधार बनाते हुए उन्होंने सिविल और क्रिमिनल मानहानि केस दर्ज करवाए। सिविल केस में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की। वहीं, आपराधिक शिकायत में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्यवाही की मांग की थी।

 

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला-

यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के सुझाव के बाद, शिवराज व तन्खा ने लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। संसद में मुलाकात और बातचीत के बाद, विवेक तन्खा ने चुनाव के दौरान दिए गए बयानों के संबंध में दायर किए गए सिविल और आपराधिक मानहानि के मामलों को वापस लेने का फैसला किया। समझौते को अभिलेख पर लेते हुए करते सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश व न्यायमूर्ति एनके सिंह की युगलपीठ ने मानहानि के प्रकरण को निरस्त करने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया था। तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पंचायत चुनावों पर रोक के लिए दोषी ठहराया। ऐसा करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों को गलत तरीके से पेश किया। इसी के व्यथित होकर उन्होंने मानहानि का नोटिस भेज दिया था। बाद में अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया, जो जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन रहने के दौरान प्रकरण निरस्त कराने शिवराज सहित अन्य पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे।

Next Post

'कबड्डी के चाणक्य' रणधीर सिंह सहरावत गुजरात जायंट्स के हेड कोच बने

Wed Mar 11 , 2026
अहमदाबाद, 11 मार्च (वार्ता) अडानी स्पोर्ट्सलाइन ने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के आने वाले सीजन से पहले अनुभवी कबड्डी कोच रणधीर सिंह सहरावत को गुजरात जायंट्स का हेड कोच बनाया है। “कबड्डी के चाणक्य” के नाम से मशहूर, सहरावत लीग के सबसे अनुभवी कोचों में से एक हैं, जो 2014 […]

You May Like