NABH की अनिवार्यता अव्यावहारिक, आयुष्मान योजना से बाहर हो जाएंगे छोटे अस्पताल: विक्रम

भोपाल। मप्र कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने आरोप लगाया है कि राज्य की भाजपा सरकार ऐसी स्वास्थ्य नीति अपना रही है, जिससे बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंच रहा है, जबकि छोटे और मझोले निजी अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है। इस संवाददाता से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही डॉक्टरों की कमी, अपर्याप्त ढांचे और सरकारी अस्पतालों में सीमित सुविधाओं के कारण संघर्ष कर रही है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए पूर्ण NABH मान्यता अनिवार्य करने का निर्णय अव्यावहारिक है और इससे छोटे व मध्यम अस्पतालों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि NABH प्रमाणन एक स्वैच्छिक गुणवत्ता मानक है, जिसकी प्रक्रिया जटिल और खर्चीली होती है तथा इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ और संसाधनों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय लागू हुआ तो कई छोटे अस्पताल योजना से बाहर हो सकते हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण मरीजों की इलाज तक पहुंच प्रभावित होगी। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

 

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