भारत ने अफगानिस्तान पर हुए हवाई हमलों की संयुक्त राष्ट्र में निंदा की

नयी दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र, 10 मार्च (वार्ता) भारत ने अफगानिस्तान पर हाल ही में हुए हवाई हमलों की संयुक्त राष्ट्र में कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सीमा पार संघर्षों के बीच भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्य संप्रभुता के सिद्धांत का ‘घोर उल्लंघन’ करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने महासचिव की रिपोर्ट में उजागर की गयी उन चिंताओं का उल्लेख किया, जो सीमा पार हिंसा के कारण हताहत होने वाले नागरिकों से जुड़ी हैं। श्री हरीश ने कहा, “महासचिव की रिपोर्ट में सीमा पार सशस्त्र हिंसा के कारण नागरिकों के प्रभावित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है। हम महासचिव के उस आह्वान का समर्थन करते हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत दायित्वों का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।”

उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान के क्षेत्र पर हुए हवाई हमलों की भारत कड़ी निंदा करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्य संप्रभुता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन हैं।” भारतीय दूत ने इस भू-आबद्ध देश पर आर्थिक दबाव के संबंध में भी चिंता जतायी। श्री हरीश ने गंभीर चिंता जताते हुए “व्यापार के लिए रास्ता रोकने और चारों तरफ जमीन से घिरे देश की पहुंच को जानबूझकर बंद कर व्यापार और पारगमन आतंकवाद के अभ्यास का उल्लेख किया।” उन्होंने कहा, “ऐसी कार्रवाइयों के सामने भू-आबद्ध विकासशील देशों पर संयुक्त राष्ट्र की घोषणाएं खोखली लगती हैं। इन देशों की व्यापारिक और पारगमन संबंधी मजबूरियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।”

भारत के रुख की पुष्टि करते हुए श्री हरीश ने कहा, “हम इन कृत्यों की निंदा करते हैं और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन की भी पुष्टि करते हैं।” उन्होंने आतंकवाद के निरंतर खतरे का भी जिक्र किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया कि आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे संगठन अब सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा न दे सकें। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे उनके सहयोगी संगठन और ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ जैसे लश्कर के प्रॉक्सी संगठन भी शामिल हैं। उन्होंने उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जो इन समूहों के अभियानों में मदद करते हैं।

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब पाकिस्तानी और अफगान बलों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई हमले किए हैं, जो हाल के वर्षों में दोनों पड़ोसियों के बीच सबसे घातक लड़ाई बन गयी है। इस्लामाबाद ने इन शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को ‘खुली जंग’ करार दिया है। यूएनएएमए के अनुसार, रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान के हवाई हमलों में छह मार्च तक 185 निर्दोष नागरिक मारे गये हैं। इनमें से लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं और एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
इन झड़पों को नौ दिन हो गये हैं, जो बार-बार संयम बरतने की अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बावजूद जारी हैं।दोनों पक्षों ने शुक्रवार को सीमा पार अभियानों में दर्जनों दुश्मन सैनिकों को मारने का दावा किया।

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