नई दिल्ली | ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से कमर्शियल गैस की किल्लत बढ़ गई है। सरकार ने पैनिक बुकिंग और कालाबाजारी को रोकने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) के तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक ले जाएं और अन्य हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में डायवर्ट करें ताकि घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
एस्मा (ESMA) एक विशेष कानून है जिसे सार्वजनिक महत्व की अनिवार्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए लगाया जाता है। इसके लागू होने के बाद गैस वितरण और उत्पादन से जुड़े कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते और सेवा में बाधा डालने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आयात करता है, जो समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण संकट में है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद देश के आम नागरिकों के रसोई घर में गैस की कमी न होने पाए।
गैस सप्लाई रुकने की खबरों के बीच महाराष्ट्र के रत्नागिरि, कोल्हापुर और राजारामपुरी जैसे इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। उपभोक्ताओं में डर है कि आने वाले समय में डिलीवरी पूरी तरह बंद हो सकती है, जिससे कई केंद्रों पर बुकिंग के बावजूद 10 से 15 दिनों का वेटिंग पीरियड चल रहा है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आयात के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों की भी तलाश की जा रही है।

