जबलपुर:चार लाख रूपए की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किये गए सेंट्रल जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने ट्रायल के दौरान अभियोजन को सहयोग करने व अन्य शर्तों पर जमानत का लाभ दे दिया।गौरतलब है कि कारोबारी विवेक त्रिपाठी ने सीबीआई को शिकायत देकर सीजीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा व अन्य पर जीएसटी टैक्स मामले में चार लाख रूपए की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। सीबीआई ने 17 दिसंबर 2025 को ट्रैप के दौरान सह-आरोपी को पकड़ा। बाद में विवेक वर्मा को 18 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया।
विवेक वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने कोर्ट में कहा कि शिकायत और एफआईआर में आवेदक का नाम नहीं था। तीनों वेरिफिकेशन रिपोर्ट में भी उसका नाम का उल्लेख नहीं किया गया। ट्रैप के दौरान सह.आरोपी और आवेदक के बीच हुई मोबाईल बातचीत में रिश्वत मांगने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। गवाहों ने भी विवेक वर्मा के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। दलील दी गई कि आवेदक 85 प्रतिशत दिव्यांग है और उसका बायां पैर कट चुका है।
उसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा। वहीं, सीबीआई की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता और अन्य व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत से रिश्वत मांगने के आरोप का समर्थन होता है। इसके अलावा प्री-ट्रैप मेमों के अनुसार चार लाख रुपये बरामद किए गए हैं, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
