ग्वालियर: शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक और जयारोग्य चिकित्सालय समूह के पूर्व अधीक्षक डॉ. जगदीश सिंह सिकरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने न केवल चिकित्सा जगत को झकझोर दिया है, बल्कि अब इस मामले ने एक बड़ा कानूनी और विवादित मोड़ ले लिया है। रेलवे ट्रैक पर शव मिलने के बाद, परिजनों ने अब खुलकर सामने आते हुए शहर के ही कुछ नामचीन डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के संगीन आरोप लगाए हैं।
विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेलवे ट्रैक के पास डॉ. सिकरवार का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा था, लेकिन परिजनों के बयानों ने जांच की दिशा बदल दी हैपरिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, इस पूरी त्रासदी की पटकथा 23 जनवरी को लिखी गई थी।
डॉ. सिकरवार अपनी साझेदारी वाली एक निजी पैथोलॉजी लैब में हिसाब-किताब के सिलसिले में गए थे। आरोप है कि वहां उनके साझेदारों के साथ तीखी बहस हुई। परिजनों का दावा है कि पैथोलॉजी में स्टाफ के सामने डॉ. सिकरवार के साथ अभद्र व्यवहार किया। डॉ. रमेश प्रकाश गुप्ता, उनके भाई ललित सीवी गुप्ता और पुत्र सुबोध गुप्ता पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और गंभीर धमकियां देने के आरोप लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि इस अपमान से डॉ. सिकरवार गहरे सदमे में थे, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
परिजनों की मांग और पुलिस की कार्रवाई
डॉ. सिकरवार के परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि प्रताड़ना के प्रमाण मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “हम मामले के हर पहलू को बारीकी से देख रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया गया है। पैथोलॉजी के सीसीटीवी फुटेज और अन्य गवाहों से पूछताछ के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
