
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित सरकारी स्कूलों की स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत विवरण पेश करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति का भी पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की है।
दरअसल, जबलपुर के करौंदी स्थित कैंट स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर प्रकाशित एक समाचार के आधार पर हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2025 को स्वत: संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि संबंधित स्कूल राज्य सरकार के बजाय स्थानीय निकाय द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस पर युगलपीठ ने निर्देश दिया कि पूरे प्रदेश में राज्य सरकार तथा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
