गुलकी जोशी के लिए इक़बाल खान के साथ स्क्रीन शेयर करना बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव

मुंबई, 06 मार्च (वार्ता) अभिनेत्री गुलकी जोशी के लिये सोनी सब के आगामी शो ‘हुई गुम यादें- एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ’, में इक़बाल खान के साथ स्क्रीन शेयर करना बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव रहा है। सोनी सब का नया शो ‘हुई गुम यादें- एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ’, एक लोकप्रिय इटैलियन ड्रामा डॉक का रूपांतरण है, जो यादों, पहचान और दूसरे मौकों की कहानी को बेहद भावनात्मक अंदाज़ में पेश करता है। शो की कहानी डॉ. देव (इक़बाल खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक मशहूर डॉक्टर हैं। लेकिन, एक हादसे के बाद उनकी ज़िंदगी अचानक बदल जाती है और उनकी याददाश्त खो जाती है। जब वे वापस उस दुनिया में लौटते हैं, जो उनके बिना आगे बढ़ चुकी है, तो उन्हें अनजाने रिश्तों, पेशेवर उम्मीदों और उस अतीत का सामना करना पड़ता है, जिसे वे अब याद नहीं कर पाते। धीरे-धीरे वे फिर से समझते हैं कि असली मायने में डॉक्टर और इंसान होने का मतलब क्या है। इस कहानी में गुलकी जोशी भी अहम् किरदार निभा रही हैं, जो डॉ. देव की एक्स-वाइफ सृष्टि का रोल कर रही हैं। उनकी मौजूदगी शो की कहानी को और भावनात्मक गहराई देती है और अस्पताल के भीतर और बाहर बदलते रिश्तों को मज़बूती और नया नज़रिया देती है।

गुलकी जोशी के लिए इक़बाल खान के साथ स्क्रीन शेयर करना सिर्फ स्क्रिप्ट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए यह बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव भी है। एक्टिंग में आने से बहुत पहले ही उनके घर में इक़बाल का नाम जाना-पहचाना था। उनकी माँ इक़बाल के पहले शो की लेखकों में से एक थीं और गुलकी ने बचपन में उस दौर की कहानियाँ घर पर सुनी थीं। स्कूल में उन्हें याद है कि उनके दोस्त इक़बाल के किरदार के दीवाने थे, एपिसोड्स पर चर्चा करते थे और उनके रोल पर फिदा रहते थे, जबकि गुलकी चुपचाप इस फेनोमिना को करीब से देखती थीं। आज, सालों बाद, इक़बाल के सामने को-एक्टर के तौर पर खड़े होना उनके लिए किसी इत्तेफाक से कम नहीं, बल्कि एक फुल-सर्कल मोमेंट जैसा है। गुलकी इसे सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं मानतीं, बल्कि इसे ज़िंदगी का खूबसूरत सबक मानती हैं कि कैसे पुरानी यादें कभी-कभी हकीकत बनकर सामने आती हैं।

गुलकी जोशी ने कहा, “कभी-कभी इंडस्ट्री बहुत बड़ी लगती है और कभी-कभी बहुत छोटी। मेरे लिए इक़बाल के साथ काम करना उन दुर्लभ फुल-सर्कल मोमेंट्स में से एक है। इसमें एक खास नॉस्टैल्जिया जुड़ा है, क्योंकि मैंने घर पर उस दौर की कहानियाँ सुनी हैं। आज उनके सामने को-एक्टर के तौर पर खड़ा होना मेरे लिए बेहद अनोखा है। सबसे ज़्यादा मैं उनकी मौजूदगी को महत्व देती हूँ, क्योंकि वे सीन में बहुत सहज और इंस्टिंक्टिव रहते हैं। इससे इमोशनल सीन करना आसान और ईमानदार लगता है। हमारे काम करने के तरीके में आपसी सम्मान है और वही स्क्रीन पर भी दिखता है। यह उन अनुभवों में से एक है, जो याद दिलाते हैं कि ज़िंदगी कैसे अप्रत्याशित तरीके से सही समय पर चीज़ों को जोड़ देती है।” ‘हुई गुम यादें- एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ’, जल्द ही सोनी सब पर प्रसारित होगा।

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