अमेरिका-ईरान की वार्ता सफलता के करीब थी, लेकिन संघर्ष ने प्रक्रिया रोक दी: लावरोव

मास्को, 05 मार्च (वार्ता) रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को कहा कि पिछले साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफलता के करीब थी, लेकिन संघर्ष के कारण प्रक्रिया बाधित हो गई। ‘स्पुतनिक’ की रिपोर्ट के अनुसार, श्री लावरोव ने एक दूतावास गोलमेज सम्मेलन में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कुछ समय से चल रही थी और पिछले साल जून में सफलता के करीब थी। उन्होंने बताया कि वार्ता के अगले दौर से ठीक पहले ’12 दिनों का युद्ध’ छिड़ गया। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ आक्रामकता का पहला कृत्य बताया। श्री लावरोव ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि चल रहा संघर्ष वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों को कमजोर कर सकता है। रूसी मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की संप्रभुता और अपने राजनीतिक भविष्य को निर्धारित करने के उसके अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के उन बयानों की आलोचना की जिनमें ईरानी सरकार को नाजायज घोषित किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दृष्टिकोण के विपरीत हैं। स्पुतनिक ने श्री लावरोव के हवाले से कहा, “ईरान की सरकार संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्य है। उसके सभी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसमें यह भी शामिल है कि कोई और ईरानी लोगों के लिए फैसला नहीं ले सकता।”

रूसी विदेश मंत्री ने पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हमलों को तत्काल रोकने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर युद्ध विराम के लिए खड़े हों, जिसकी शुरुआत उन हमलों पर पूर्ण रोक से हो जो नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे के विनाश का कारण बनते हैं।” उन्होंने नोट किया कि ऐसी घटनाएं कई अरब देशों में हुई हैं। श्री लावरोव ने यह भी कहा कि रूस का खाड़ी देशों से आह्वान है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली हमलों को रोकने के प्रयासों का समर्थन करें। उन्होंने तर्क दिया कि खाड़ी देशों ने ईरानी हमलों की तो निंदा की है, लेकिन वे अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों पर काफी हद तक चुप रहे हैं। रूसी मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन संघर्ष को तेजी से समाप्त करने का आह्वान करने वाला एक प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने ईरान से जुड़े संघर्ष के संबंध में भी इसी तरह का प्रस्ताव अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “मेरी राय में, ऐसा प्रस्ताव उचित होगा और हम इसका पूर्ण समर्थन करेंगे।” इसी गोलमेज सम्मेलन के दौरान, मास्को में बहरीन के राजदूत अहमद अलसाती ने रूस से अपील की कि वह ईरान को बहरीन या अन्य अरब देशों के ठिकानों पर हमला न करने के लिए मनाए। अरब देशों के एक समूह की ओर से बोलते हुए श्री अलसाती ने कहा, “हमें उम्मीद है कि रूस कड़ा रुख अपनाएगा और हमारे देश के खिलाफ आक्रामकता की निंदा करेगा। हम चाहते हैं कि रूस इस आक्रामकता को रोकने के लिए ईरान पर दबाव डाले।”

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