भारत का 10 वर्षीय सेमीकंडक्टर रोडमैप: चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर कदम, 2035 तक वैश्विक हब बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित

नई दिल्ली | नीति आयोग ने भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से 10 वर्षीय रोडमैप “फ्यूचर ऑफ इंडियाज सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री” जारी किया है। यह रणनीतिक योजना भारत को विदेशी निर्भरता से मुक्त करने और 2035 तक वैश्विक चिप सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर केंद्रित है। यह रोडमैप ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को गति प्रदान करेगा, जिससे देश में 120 से 150 अरब डॉलर का घरेलू इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य है।

वर्तमान में भारत अपनी 90-95 प्रतिशत चिप जरूरतें अन्य देशों से आयात करता है, जिस पर पिछले वर्षों में भारी विदेशी मुद्रा खर्च हुई है। चीन और ताइवान पर अत्यधिक निर्भरता न केवल आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जोखिमपूर्ण है। महामारी के दौरान उपजी चिप किल्लत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आत्मनिर्भरता ही भविष्य की डिजिटल आजादी और सुरक्षा के लिए एकमात्र विकल्प है।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नीति आयोग ने पाँच प्रमुख रणनीतियां तय की हैं, जिनमें अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन, निवेश के लिए अनुकूल नीतियां, उन्नत पैकेजिंग और निर्माण, कुशल मानव संसाधन का विकास तथा मित्र देशों के साथ मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन का निर्माण शामिल है। भारत में सेमीकंडक्टर की मांग 19 प्रतिशत की तीव्र दर से बढ़ रही है, जिससे 2035 तक बाजार के 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार करने की प्रबल संभावना है।

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