तेहरान | ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने हिंद महासागर में तैनात अमेरिकी नौसेना के एक डिस्ट्रॉयर पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी लेकर दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है। ईरान का दावा है कि उसने अपने तट से करीब 650 किलोमीटर दूर अमेरिकी युद्धपोत को उस वक्त निशाना बनाया, जब वह ईंधन भर रहा था। हमले में ‘गदर-380’ बैलिस्टिक मिसाइल और ‘तलैयाह’ क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले के बाद अमेरिकी जहाज और टैंकर में भीषण आग लग गई, हालांकि अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने अभी तक इस नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ईरानी नेतृत्व ने इस कार्रवाई को “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” का हिस्सा बताया है। तेहरान का कहना है कि यह हमला उनके सुप्रीम लीडर के खिलाफ इजराइल और अमेरिका के हालिया कदमों का करारा जवाब है। IRGC ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक पश्चिमी ताकतें क्षेत्र से पीछे नहीं हट जातीं। इससे पहले भी ईरान समर्थित गुटों ने कतर, यूएई और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था। इस ताजा हमले ने हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
मिसाइल हमले से ठीक पहले दुबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास भी एक संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी मध्य कमान के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा है कि अमेरिका का अभियान जारी है और वे ईरान की जवाबी क्षमता को कमजोर कर रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। फिलहाल, पश्चिम एशिया से लेकर हिंद महासागर तक का पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

