मुंबई | भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महाराष्ट्र की 4 राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का है, जिन्हें संगठन में उनके शानदार काम का इनाम देते हुए उच्च सदन भेजा जा रहा है। वहीं, एनडीए के पुराने सहयोगी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है। आठवले का नामांकन दलित मतों को एकजुट रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन दो बड़े चेहरों के साथ पार्टी ने दिल्ली और महाराष्ट्र की राजनीति के बीच एक नया शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश की है।
पार्टी ने केवल बड़े नामों पर ही दांव नहीं लगाया, बल्कि जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए माया चिंतामण ईवनाते और रामराव वडकुते को भी टिकट दिया है। माया ईवनाते के जरिए बीजेपी ने आदिवासी समुदाय और विदर्भ क्षेत्र में पैठ बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जबकि रामराव वडकुते का चयन ओबीसी समुदाय के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जानकारों का मानना है कि इन उम्मीदवारों के जरिए बीजेपी ने मराठा, दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्गों को एक साथ साधने का ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फॉर्मूला अपनाया है, जो आगामी चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकता है।
बीजेपी के इन चेहरों के मैदान में उतरने से महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए चुनावी गणित पेचीदा हो गया है। विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए बीजेपी के इन चारों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राज्यसभा की 37 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है, जबकि मतदान 16 मार्च को होगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव को चुनौतीपूर्ण बनाएगा या ये उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे।

