
उज्जैन। होली पर्व के अवसर पर महाकाल मंदिर में सोमवार की शाम हुई संध्या आरती में भगवान को परंपरागत रूप से श्रृंगार करने के पश्चात पुजारियों ने शक्कर की माला अर्पित की। इसके बाद हर्बल गुलाल लगाकर होली खेलकर पर्व मनाया गया। संध्या आरती के पश्चात मंदिर प्रांगण में सजी होली का पूजन व आरती की गई तथा सबसे पहले होली का दहन किया गया।
महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि देश में सबसे पहले होली उज्जैन के महाकाल मंदिर में जलाने की परंपरा है। इसका पुजारियों ने मंदिर में निर्वहन करते हुए उत्साह व उमंग के साथ पर्व मनाया। मंदिर में बाहर से किसी भी प्रकार के रंग-गुलाल लाकर उपयोग करने पर मंदिर प्रशासन ने पहले से प्रतिबंध लगा रखा है। इसको ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में भी भगवान को चढ़ाने के लिए एक किलो हर्बल गुलाल मंदिर समिति ने ही पुजारियों को उपलब्ध कराई। सुरक्षा कारणों के चलते इस बार आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई। मंदिर में पूर्व में हुई आग की घटना को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सावधानी बरती। होलिका दहन के दौरान केवल मंदिर के पंडे-पुजारी, समिति के अधिकारी व उज्जैन जिला व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। होली जलने के साथ ही चैत्र मास की शुरुआत होते ही मंदिर में आरतियों का समय भी बदल जाएगा। साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती की जाती है। वहीं चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय है। भगवान का ठंडे जल से स्नान भी शुरू हो जाएगा।
आज धुलेंडी पर भी भस्मारती में
भगवान को गुलाल अर्पित होगी
महाकाल मंदिर में आज मंगलवार को धुलेंडी पर्व पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्मारती में भी सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल लगाया जाएगा। इसके बाद भांग और चंदन से विशेष शृंगार किया जाएगा। इसके साथ ही नगर में होली पर रंग-गुलाल का पर्व शुरू हो जाएगा।
आज चंद्रग्रहण पर भी पट खुले
रहेंगे, दर्शन होंगे, भोग नहीं लगेगा
आज मंगलवार को चंद्रग्रहण के दौरान भी महाकाल मंदिर के पट दिनभर खुले रहेंगे। आम दर्शन भी बाहर से चालू रहेंगे। केवल सुबह से सूतक लगने के कारण सुबह की दद्योदक आरती व भोग आरती में भगवान को भोग नहीं लगाया जाएगा। यह शाम को ग्रहण समाप्ति के पश्चात शुद्धिकरण कर शृंगार संध्या आरती में लगेगा।
