बैतूल की अनूठी होली: 400 सालों से वक्त से पहले त्योहार मनाने की अनोखी रीत

बैतूल। बैतूल जिले में होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि लोक आस्था और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है।

जिले के कुछ गांवों में ग्रामीण निर्धारित तिथि से अलग, कहीं एक या दो दिन पहले तो कहीं एक दिन बाद होली मनाने की अनूठी परंपरा निभाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी ग्रामीण पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पालन कर रहे हैं।

घोड़ाडोंगरी तहसील के बरेलीपार गांव में करीब 400 वर्षों से होली सहित अन्य प्रमुख त्योहार निर्धारित तिथि से पहले मनाए जाते हैं। ग्रामीण शिवरतन सलाम बताते हैं कि गांव में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और सभी परिवार इसका पालन करते हैं। यहां होली, दिवाली और अन्य पर्व तय तिथि से एक या दो दिन पहले मना लिए जाते हैं, जबकि वास्तविक तिथि पर गांव में शांति बनी रहती है और कोई उत्सव नहीं होता।

ग्रामीण कमल उइके के अनुसार, इस वर्ष जहां देशभर में 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली मनाई जा रही है, वहीं बरेलीपार गांव में 1 मार्च को होलिका दहन और 2 मार्च को धुरेंडी मनाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा गांव में पूर्व में हुई अनहोनी घटनाओं से जुड़ी मान्यता के कारण शुरू हुई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने तय किया कि त्योहार पहले ही मनाए जाएंगे।

ग्रामीण राजेंद्र वर्मा बताते हैं कि पहले निर्धारित तिथि पर त्योहार मनाने के दौरान गांव में किसी न किसी प्रकार की अनहोनी हो जाती थी। इसके बाद कुछ समय तक त्योहार मनाना बंद कर दिया गया था। बाद में ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लिया कि भविष्य में त्योहार तय तिथि से पहले मनाए जाएंगे, ताकि गांव में सुख-शांति बनी रहे। तब से यह परंपरा लगातार जारी है।

वहीं बैतूल जिले के रायपुर गांव में होली निर्धारित तिथि से एक दिन बाद मनाई जाती है। ग्रामीण चंद्र मर्सकोले के अनुसार, यह परंपरा पूर्वजों द्वारा स्थापित की गई थी और आज भी ग्रामीण उसी परंपरा का पालन कर रहे हैं। गांव की सरपंच ज्योति टेकाम ने बताया कि यह परंपरा गांव की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है और इसे संरक्षित रखना ग्रामीणों की जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इन परंपराओं ने गांव की सामाजिक एकता को मजबूत किया है और ग्रामीणों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखा है। आधुनिकता के इस दौर में भी बैतूल के ये गांव अपनी अनूठी परंपराओं को संजोए हुए हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं।

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